जींद। हांसी रोड पर 32 वर्षों से खादी ग्रामोद्योग का सफल संचालन कर रहीं किरण सैनी जिले की महिलाओं के लिए प्रेरणा बनी हैं। घर की बिगड़ी व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए उन्होंने कदम बढ़ाए थे।
किरण सैनी ने सबसे पहले सरस्वती खादी ग्रामोद्योग में नौकरी की। एक समय ऐसा भी था जब उनके घर में चाय से लेकर दो वक्त के भोजन तक की परेशानी रहती थी। आर्थिक तंगी और सामाजिक तानों के बीच उन्होंने हार मानने की बजाय आगे बढ़ने का फैसला किया। ग्रामोद्योग में कामकाज सीखा, उत्पादन और प्रबंधन की बारीकियां समझीं और आत्मनिर्भर बनने का संकल्प लिया। यही अनुभव आगे चलकर उनके जीवन की सबसे बड़ी पूंजी बना।
नौकरी के दौरान सीखे अनुभव के आधार पर उन्होंने अमन खादी ग्रामोद्योग संघ के नाम से अपना उद्योग खड़ा किया। शुरुआत आसान नहीं थी। पूंजी की कमी, बाजार में प्रतिस्पर्धा और सामाजिक दबाव जैसी कई बड़ी चुनौतियां सामने आईं लेकिन परिवार के सहयोग से उन्होंने हर परिस्थिति का डटकर सामना किया।
लगातार मेहनत और गुणवत्ता के दम पर उनका खादी उद्योग आगे बढ़ता गया। आज उनके संस्थान में करीब 120 महिलाओं को रोजगार मिला हुआ है। इन महिलाओं को सिलाई, बुनाई और खादी उत्पादों के निर्माण का प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। उसके ग्रामोद्योग में खादी जैकेट, कुर्ता पायजामा, बेड सीट, लेडीज सूट, ऊनी मफलर और कंबल तैयार किए जाते हैं।
करीब पांच वर्ष पहले पति के निधन के बाद भी किरण सैनी का हौसला नहीं टूटा। उन्होंने जिम्मेदारियों को और मजबूती से संभाला। बचपन से ही परिस्थितियों से लड़ना सीख चुकी किरण ने हर चुनौती को अवसर में बदला। आज वह जिले की एकमात्र ऐसी महिला उद्यमी मानी जाती हैं, जो खादी उद्योग को बेहतर प्रबंधन के साथ संचालित कर रही हैं। किरण सैनी की यह कहानी न सिर्फ आत्मनिर्भरता की मिसाल है, बल्कि यह साबित करती है कि संघर्ष ही सफलता की असली नींव होता है।