उचाना। सावन की आखिरी पूर्णिमा को लेकर उलझन की स्थिति बनी हुई है। इस बार पूर्णिमा तिथि दो दिन होने के कारण यह असमंजस है। अगस्त महीने का पहला और सावन मास के अंतिम पूर्णिमा का व्रत कब है इसे लेकर थोड़ा असमंजस बना हुआ है। दरअसल इस बार पूर्णिमा तिथि दो दिन होने के कारण व्रत की तारीख को लेकर उलझन है।
पूर्णिमा व्रत भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित है। इस दिन माता लक्ष्मी और भगवान शिव की पूजा अर्चना की जाती है। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को करने से व्यक्ति को बैकुंठ में स्थान मिलता है साथ ही व्यक्ति की सारी मनोकामनाएं पूरी होती है। महाराजा अग्रसेन मंदिर पुजारी अशोक शर्मा ने कहा कि वैदिक पंचांग की गणना के अनुसार आठ अगस्त को पूर्णिमा तिथि का आरंभ दोपहर में दो बजकर 13 मिनट पर होगा और नौ अगस्त को पूर्णिमा तिथि दोपहर में एक बजकर 25 मिनट तक रहेगी।
शास्त्रीय विधान के अनुसार पूर्णिमा तिथि का व्रत उस दिन रखा जाता है जिस दिन शाम के समय पूर्णिमा तिथि लगी हो। ऐसे में पूर्णिमा का व्रत आठ अगस्त शुक्रवार को रखा जाएगा, क्योंकि इस दिन पूर्णिमा तिथि शाम में रहेगी। हालांकि रक्षाबंधन का पर्व पूर्णिमा तिथि उदय काल होने पर मनाया जाता है। इसलिए रक्षाबंधन नौ अगस्त और पूर्णिमा व्रत आठ अगस्त को रखा जाएगा।