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Jind News: खेल और फौज में करसोला का दम, बेटियों से लेकर जवानों ने लिखी सफलता की नई इबारत

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5 जुलाना 01: करसोला गांव का स्टेडियम का फोटो। संवाद
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कर्मवीर
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जुलाना। क्षेत्र का करसोला गांव केवल कृषि प्रधान गांव के रूप में ही नहीं बल्कि खेल और सेना में योगदान देने वाले गांव के रूप में भी अपनी अलग पहचान रखता है। करसोला गांव की मिट्टी में बचपन से ही खेलों और देश सेवा की भावना देखने को मिलती है।
यही कारण है कि गांव के अनेक युवा खेल मैदानों से लेकर सेना के बड़े पदों तक अपनी पहचान बना चुके हैं। गांव की बेटियों ने भी राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतकर अपने परिवार और गांव का नाम रोशन किया है।
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अब तक गांव के 10 जवान सेना में कैप्टन, मेजर और कर्नल जैसे उच्च पदों पर सेवाएं दे चुके हैं। इनमें एक विशेष उदाहरण अंकित लाठर और उनकी पत्नी राजबाला का हैं। दंपती भारतीय सेना में मेजर के पद पर कार्यरत हैं। गांव के लोग इस उपलब्धि को गर्व की दृष्टि से देखते हैं।
करसोला गांव के खिलाड़ी और सैनिक आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा हैं। उनकी उपलब्धियां यह साबित करती हैं कि मेहनत और समर्पण के बल पर ग्रामीण क्षेत्र के युवा भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बना सकते हैं। खेल और सेना के क्षेत्र में करसोला गांव की यह गौरवशाली परंपरा आज भी लगातार आगे बढ़ रही है।

राष्ट्रीय कुश्ती में स्वर्ण जीतकर आईटीबीपी पहुंचीं साक्षी
गांव की बेटी साक्षी लाठर ने राष्ट्रीय कुश्ती प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर बड़ी उपलब्धि हासिल की। उनकी इस सफलता के बाद उन्हें भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) में सेवा का अवसर मिला और वर्तमान में वह देश की सुरक्षा में अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं। -कप्तान लाठर, ग्रामीण
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प्रतिभाशाली खिलाड़ी बंटी रानी ने राष्ट्रीय कुश्ती प्रतियोगिता में रजत पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। खेलों में सफलता प्राप्त करने के बाद उन्होंने सेना में भर्ती होकर देश सेवा का मार्ग चुना और आज भारतीय सेना का हिस्सा हैं।
- रघबीर सिंह, ग्रामीण

गांव के विशाल लाठर ने प्रो कबड्डी लीग में चार बार खेलकर राष्ट्रीय स्तर पर गांव का नाम रोशन किया है। उनकी उपलब्धियों से गांव के युवाओं को खेलों के प्रति प्रेरणा मिल रही है। ग्रामीणों का कहना है कि विशाल की सफलता के बाद कई युवा कबड्डी और अन्य खेलों की ओर आकर्षित हुए हैं। - सुरेश, ग्रामीण।
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सेना के क्षेत्र में भी करसोला गांव का इतिहास गौरवशाली रहा है। गांव के वीर सैनिक कैप्टन फतेह सिंह ने वर्ष 1965 के भारत-पाक युद्ध में बहादुरी का परिचय दिया था। युद्ध में उनके साहस और वीरता के लिए उन्हें तत्कालीन राष्ट्रपति के हाथों महावीर चक्र से सम्मानित किया गया। उनकी वीर गाथा आज भी गांव के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है। - आशीष कुमार, युवा ग्रामीण।
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फोटो कैप्शन:
5 जुलाना 01: करसोला गांव का स्टेडियम। संवाद
5 जुलाना 02: कप्तान लाठर।
5 जुलाना 03: रघबीर सिंह ।
5 जुलाना 04: सुरेश।
5 जुलाना 05: आशीष कुमार।

5 जुलाना 01: करसोला गांव का स्टेडियम का फोटो। संवाद

5 जुलाना 01: करसोला गांव का स्टेडियम का फोटो। संवाद

5 जुलाना 01: करसोला गांव का स्टेडियम का फोटो। संवाद

5 जुलाना 01: करसोला गांव का स्टेडियम का फोटो। संवाद

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