नरवाना। हरियाणा के जींद जिले के गांव कालवन स्थित महर्षि दयानंद सरस्वती प्रवासी पक्षी संरक्षण स्थल इन दिनों प्रकृति की अनूठी छटा बिखेर रहा है। सर्दियों की शुरुआत के साथ ही यहां देसी-विदेशी पक्षियों का आगमन शुरू हो गया है। पूरा इलाका पक्षियों की चहचहाहट और कलरव से गूंज उठा है।
गांव कालवन की आर्य समाज कमेटी के सदस्य बलजीत आर्य ने बताया कि यह संरक्षण स्थल अब प्रवासी पक्षियों के लिए सुरक्षित और पसंदीदा ठिकाना बन चुका है। वर्तमान में यहां कई दुर्लभ और आकर्षक प्रजातियों के पक्षी देखे जा रहे हैं। इनमें बार-हेडेड गूज (धनेश) विशेष रूप से चर्चा का विषय बने हुए हैं जो मंगोलिया जैसे अत्यधिक ठंडे देशों से सैकड़ों की संख्या में यहां आते हैं। लंबी उड़ान के बाद ये पक्षी कालवन की झीलों में विश्राम करते हुए दिखाई दे रहे हैं। इसके अलावा चम्मच चोंच बगुला (स्पून बिल) भी संरक्षण स्थल की शोभा बढ़ा रहे हैं। ये पक्षी उत्तरी अमेरिका, यूरोप और उत्तरी एशिया में गर्मियों के दौरान प्रजनन करते हैं और सर्दियों में भारत की ओर रुख करते हैं। इनके साथ ही पानी काग (कामोरेंट), हंस (गूज), लंबी टांग वाली जल चिड़िया ब्लैक विंग्ड स्टिल्ट, सफेद बगुला (एग्रेट), टिटीरी (लेप्टिंग) और चम्मच बत्तख (नॉर्दर्न सोवलर) भी यहां बड़ी संख्या में मौजूद हैं।
हरियाणा जैव विविधता बोर्ड पंचकूला में जींद के जिला संयोजक विष्णु कुमार बागड़ी ने स्थानीय ग्रामीणों व पक्षी प्रेमियों से अपील की कि इस जगह पर किसी प्रकार की गंदगी न फैलाएं । इससे विदेशी पक्षी यहां आना बंद कर देंगे। उन्होंने कहा कि प्रवासी पक्षियों की मौजूदगी से न केवल पर्यावरण संतुलन को बल मिल रहा है, बल्कि यह क्षेत्र पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बनता जा रहा है।
जनवरी में होगी जल पक्षियों की गणना
हरियाणा राज्य जैव विविधता बोर्ड की ओर से एशियन वॉटर बर्ड सेंसस-2026 कराने की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। यह सेंसस हर वर्ष की भांति इस बार भी जनवरी माह में प्रदेश की प्रमुख आर्द्रभूमियों पर आयोजित किया जाएगा। जिसको लेकर बोर्ड द्वारा पत्र जारी किया गया है। पत्र के अनुसार तय कार्यक्रम के तहत जल पक्षियों की संख्या और प्रजातियों की गणना कर उनके संरक्षण की स्थिति का आकलन किया जाएगा। एशियन वॉटर बर्ड सेंसस एक सिटीजन-साइंस कार्यक्रम है, जिसमें वन विभाग के अधिकारी, स्थानीय बर्ड वॉचर, शोधकर्ता, जैव विविधता प्रबंधन समिति (बीएमसी) के सदस्य और आसपास के ग्रामीण भाग लेते हैं। सेंसस से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जल पक्षियों की जनसंख्या प्रवृत्तियों का अध्ययन किया जाता है। यह सेंसस इंटरनेशनल वॉटरबर्ड सेंसस (आईडब्ल्यूसी) के तहत वेटलैंड्स इंटरनेशनल के समन्वय से कराया जाता है। सेंसस के दौरान सभी चयनित स्थलों पर संबंधित जिलों के वन अधिकारी, वन्यजीव निरीक्षक और फील्ड स्टाफ तैनात रहेगा। हरियाणा राज्य जैव विविधता बोर्ड ने सभी वन मंडल अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सेंसस के सुचारू संचालन के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं समय रहते पूरी करें और स्थानीय बर्ड वॉचरों व शोधकर्ताओं की भागीदारी सुनिश्चित करें। बोर्ड का मानना है कि यह गणना प्रदेश में आर्द्रभूमियों और जल पक्षियों के संरक्षण के लिए ठोस नीतियां बनाने में सहायक सिद्ध होगी।
– यहां-यहां होगी जल पक्षियों की गणना
.6 जनवरी 2026 — सुल्तानपुर नेशनल पार्क, गुरुग्राम
.13 जनवरी 2026 — बिरही कलां वेटलैंड, चरखी दादरी
.14 जनवरी 2026 — कालवन वेटलैंड, जींद
.16 जनवरी 2026 —भिंडावास वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी, झज्जर।
जनवरी में हरियाणा के कई जगहों पर पक्षियों की गणना की जाएगी क्योंकि विदेशों से भी हजारों की संख्या में पक्षी हमारे यहां पर पहुंच रहे है। 14 जनवरी को कालवन वेटलैंड में पक्षियों की गणना के लिए हमारी टीम जाएगी। इससे पहले 6 जनवरी को गुरुग्राम, 13 को चरखी दादरी और आखिर में 16 को झज्जर में गणना की जाएगी। सभी से अपील है पक्षियों को तंग न करें और आस पास गंदगी न फैलाएं।
– टीके रॉय, पक्षी विशेषज्ञ, एशियन वॉटर बर्ड सेंसस।