उदयपुर गांव में मौके पर पहुंची टीम।
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गांव उदयपुर में जिला महिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारियों ने नाबालिग लड़केे की शादी रुकवाई है। इस शादी में जहां दूल्हे की उम्र लगभग 16 वर्ष थी वहीं दुल्हन की उम्र 18 वर्ष पाई गई। ऐसे में उचाना खुर्द से आई बारात को बिना दुल्हन के ही वापिस घर लौटना पड़ा। विभाग द्वारा दोनो पक्षों से लिखित में लड़का-लड़की के बालिग होने तक शादी नहीं करवाने का प्रशासन को बयान दिया गया। जिला महिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी करमिंद्र कौर को पुलिस कंट्रोल रूम से सूचना मिली थी कि गांव उदयपुर में एक नाबालिग लड़की व लड़केे की शादी करवाई जा रही है और बारात भी आ चुकी है।
सूचना मिलते ही सहायक बाल विवाह निषेध अधिकारी रवि लोहान, महिला हेड कांस्टेबल गीता देवी, कांस्टेबल अशोक कुमार उचाना थाना पुलिस के साथ विवाह स्थल पर पहुंचे और दूल्हा व दुल्हन के परिवार वालों से दोनों के प्रमाण पत्र मांगे तो पहले तो दोनों परिवारों ने कोई भी सबूत देने में आना कानी की लेकिन जब सख्ती की तो लगभग पांच घंटे के बाद स्कूल सर्टिफिकेट पत्र दिखाए उनमें दूल्हा नाबालिग पाया गया और वह बाहरवीं कक्षा का छात्र मिला जबकि दुल्हन की उम्र 18 वर्ष मिली। नाबालिग लड़के के बालिग होने का परिवार वाले कोई भी प्रमाण नहीं दे सके।
इससे साफ हुआ कि लड़का नाबालिग था। इस पर टीम ने शादी न करने के लिए लड़के व उसके अभिभावकों को समझाया कि वह लड़के के 21 वर्ष की उम्र होने के बाद ही उसकी शादी करें इसके बावजूद भी अगर आप नाबालिग लड़के की शादी करते हैं तो आप सभी के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस पर दोनों परिवार सहमत हो गए और शादी को रोक दिया गया और दोनों परिवारों द्वारा महिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध विभाग के अधिकारियों को लिखित में बयान दिया है कि वह कानून की पालना करेंगे और लड़के के बालिग होने पर ही उसकी शादी करेंगे। इसके बाद बारात को बिना दुल्हन के ही उचाना खुर्द बैरंग लौटना पड़ा।