जींद। जिला कृषि विभाग की टीम ने बृहस्पतिवार को जिले के विभिन्न क्षेत्रों में कपास की फसल और धान की नर्सरी का सर्वेक्षण किया। सर्वे के दौरान खेतों में कीट व बीमारियों का प्रकोप आर्थिक नुकसान के स्तर से कम पाया गया।
क्षेत्रीय निदेशक डॉ. वंदना पांडेय के निर्देशन में आयोजित सर्वेक्षण में सहायक पौध संरक्षण अधिकारी डॉ. ईश्वर दत्त सहित अधिकारियों ने किसानों को फसल सुरक्षा के उपाय बताए। किसानों को सलाह दी गई कि धान की बुवाई से पहले बीज उपचार अवश्य करें, ताकि ड्वार्फ रोग समेत अन्य कीट एवं बीमारियों से बचाव हो सके।
रासायनिक दवाओं के बजाय यांत्रिक और जैविक उपायों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि कपास की फसल में 40 से 45 दिन बाद प्रति एकड़ चार फेरोमोन ट्रैप तथा रस चूसने वाले कीटों की निगरानी के लिए प्रति एकड़ 20 पीले या नीले स्टिकी ट्रैप लगाने चाहिए।
कीटों का प्रकोप आर्थिक नुकसान के स्तर पर पहुंचने पर ही केंद्रीय कीटनाशी बोर्ड एवं पंजीकरण समिति (सीआईबी एंड आरसी) से अनुमोदित कीटनाशकों का प्रयोग करें। किसानों को राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली (एनपीएसएस) मोबाइल एप की भी जानकारी दी गई। इससे वह फसल में लगने वाले कीटों और बीमारियों की पहचान कर तत्काल समाधान प्राप्त कर सकेंगे तथा अनावश्यक रासायनिक कीटनाशकों के उपयोग से बच सकेंगे। संवाद