फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

महिलाओं ने मंच पर खोले घूंघट, नाचकर मनाई खुशी

Thu, 23 Mar 2017 11:53 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, जींद
विज्ञापन
पर्दा उठाने के बाद मंच पर नाचकर खुशी मनाती महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
पुरुष प्रधान समाज में बात-बात पर महिलाओं के नाम से दी जाने वाली गालियों के खिलाफ तलौडा गांव में सबला कार्यक्रम हुआ। इस दौरान ग्राम पंचायत और बीबीपुर मॉडल ऑफ विमेन एंपॉवरमेंट और विलेज डेवलपमेंट अभियान के संयोजक बीबीपुर गांव के पूर्व सरपंच सुनील जागलान ने महिलाओं के नाम से दिए जाने वाले अपशब्दों के खिलाफ कानून बनाने की मांग की। मांग को रुरल, कम्युनिकेश स्ट्रेटजिस्ट पंचायती राज मंत्रालय भारत सरकार की उमा अय्यर रावला को सौंपा गया। कार्यक्रम के दौरान गांव की करीब दो दर्जन महिलाओं ने मंच पर आकर पर्दा प्रथा का विरोध करते हुए घूंघट खोला।
विज्ञापन


कार्यक्रम में जिला परिषद की चेयरपर्सन पदमा सिंगला ने शिरकत की। मुख्यातिथि उमा अय्यर ने कहा कि तलौडा गांव में यह ऐतिहासिक कदम है। महिलाओं को स्वयं को आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि पर्दा प्रथा महिलाओं के लिए ही क्यों है। उन्होंने ससुर पिता समान व जेठ बड़े भाई के समान हैं, उनसे पर्दा कैसा। दूसरे की बहू-बेटी को अपने अपनी बहू-बेटी समझें। उमा ने कहा कि महिलाओं को देवी समझकर उनकी पूजा करने की नहीं, उन्हें इंसान समझकर उन्हें इज्जत देने की जरूरत है। इस दौरान पद्मा सिंगला ने कहा कि वर्तमान समय में नारी विभिन्न क्षेत्रों में अपना सकारात्मक सहयोग दे रही हैं। आज महिलाओं ने हर क्षेत्र में अपने कीर्तिमान स्थापित किए हैं।

दिखाई महिला शोषण की कहानी
कार्यक्रम में शहीद उद्यम सिंह नाट्य मंच ने एक नई शुरुआत नाटक का मंचन किया। इसके माध्यम से महिलाओं के हर प्रकार के शोषण की कहानी को दिखा गया। नाटक में दिखाया गया कि कुछ लोग कैसे इज्जत के नाम पर महिलाओं के खिलाफ होने वाले अत्याचार को दबा देते हैं। ऐसे लोग दोषियों को भी बचाते हैं।
विज्ञापन


पुरुषों से भी मिला समर्थन
कार्यक्रम से पहले मन में कई प्रकार की शंकाएं थी, लेकिन अब बहुत अच्छा लग रहा है। महिलाओं की आजादी की बात हो रही है और पुरुषों का भी कार्यक्रम के लिए पूरा समर्थन मिला है। इससे एक सकारात्मक पहल हुई है। -मदनलाल, सरपंच तलौडा गांव।

दूर तक जाएगी तलौडा की आवाज
यह अभियान भले जींद के छोटे से गांव से शुरू हुआ है, लेकिन इसकी आवाज देश भर में जाएगी। पर्दा प्रथा महिलाओं के व्यक्तित्व में बहुत बड़ा रोड़ा है। वहीं महिलाओं के नाम से दिए जाने वालेे अपशब्द विकास में बाधक हैं। यह अभियान हर गांव में चलना चाहिए। -सुनील जागलान, पूर्व सरपंच बीबीपुर गांव

बहुत अच्छी लगी पहल
वास्तव में महिलाओं को पर्दे में रखने की पुरानी परंपरा अब समाप्त हो रही है। यह पहल बहुत अच्छी लग रही है। मानो महिलाओं को नई आजादी मिल रही है। पंचायत की यह पहल बहुत अच्छी लगी। -पूजारानी, छात्रा, गांव तलौडा।
विज्ञापन


 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें