तालाब से गंदे पानी के निकाली के लिए लगाया गया पंप।
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सिल्लाखेड़ी में आज से छह साल पहले जो गंदा पानी ग्रामीणों के लिए सिरदर्द बना था, आज वहीं गंदा पानी किसानों के लिए वरदान बन गया है। गांव की पूर्व पंचायत की बनाई गई जल संरक्षण की योजना ने पूरे गांव की तस्वीर बदलकर रख दी है। अगर आज से छह साल पहले गांव सिल्लाखेड़ी की गलियों पर नजर डालें तो करीब आधा दर्जन गलियां कीचड़ से भरी थी।
इसका मुख्य कारण गांव के गंदे पानी की उचित निकासी व्यवस्था नहीं होना था। गांव के किसानों और पूर्व पंचायत के लिए गए जल संरक्षण के फैसले से गांव को गंदे पानी से निजात मिली और किसानों को फसल में प्रयोग करने के लिए पानी। अब इसी गंदे पानी से किसानों की सैकड़ों एकड़ फसल हर सीजन लहलहाती है।
ग्रामीण लहणा पंडित, डॉ. हरिचंद बंधु, नवीन गुर्रा, राकेश गुर्रा, अशोक शर्मा, दीपू ने बताया कि गंदे पानी की निकासी नहीं होने से गांव की गलियों में गंदा पानी भरा रहता था। बदबू से ग्रामीणों का जीना हराम था। इससे निजात पाने के लिए गांव में ग्राम सभा की बैठक बुलाई गई। इसमें योजना अनुसार मनरेगा स्कीम के तहत गंदे पानी की निकासी के लिए गांव से करीब एक किलोमीटर दूर पंचायती जमीन में एक तालाब खुदवाया गया। गांव के पास लगते ओवरफ्लो तालाब का गंदा पानी निकालने के लिए खेतों के बीच से एक पाइप लाइन पंचायती जमीन में खोदे गए तालाब तक पहुंचाई गई।
इस तालाब में गंदे पानी को स्टॉक कर दिया गया। साथ ही तालाब के गंदे पानी को पाइप लाइन के माध्यम से खेतों से गुजरने वाली नहरी पानी की खाल से जोड़ दिया गया। इससे अब जिस भी किसान को फसल में पानी की जरूरत होती है, तो वह पानी ले लेता है।
पूर्व सरपंच और ग्राम सचिव ने निभाई थी अहम भूमिका
गंदे पानी के अभिशाप को वरदान में बदलने के लिए पूर्व सरपंच पवन कुमार और ग्राम सचिव मुकेश भारद्वाज ने अहम भूमिका निभाई थी। इनकी योजना ने न केवल गांव को गंदे पानी की दुर्गंध से निजात दिलाई, बल्कि उस गंदे पानी को सिंचाई योग्य बनाकर किसानों की मदद भी की। गांव सिल्लाखेड़ी में गंदे पानी का प्रबंध होने के बाद अब गांव की सभी गलियां भी ब्लॉक की ईंटों से पक्की है। इससे गांव पूर्ण रूप से स्वच्छ और साफ-सुथरा दिखाई देता है। गांव में करीब 1700 वोटरों पर करीब पांच हजार जनसंख्या है।