निजी बसों को लेकर रोडवेज कर्मचारियों और सरकार के बीच चल रही तनातनी थमने का नाम नहीं ले रही है। इसका खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। वीरवार को भी जींद में यही हुआ। अदालत के आदेश पर निजी बस ऑपरेटर कमीशन की मौजूदगी में वीरवार सुबह बस बूथ पर लगाने पहुंचे तो रोडवेज कर्मचारियों ने सरकार पर वादा खिलाफी का आरोप लगाते हुए रोडवेज का चक्का जाम कर दिया।
हालांकि लंबे रूट की बस तब तक निकल चुकी थी। इससे रोडवेज की 80 प्रतिशत बस सेवा बाधित रही। वीरवार को दिन भर पूरी तरह से परिवहन व्यवस्था निजी बसों और दूसरे डिपो से आने वाली बसों के सहारे रही। जींद डिपो की 100 से अधिक बस नहीं चलने के कारण यात्रियों को घंटों बसों का इंतजार करना पड़ा। दरअसल वीरवार सुबह ही निजी बस ऑपरेट अदालत द्वारा नियुक्त कमीशन के साथ बस स्टेंड पर पहुंचे।
अदालत के आदेश के अनुसार जिला प्रशासन को नई समय सारिणी के अनुसार निजी बसों का परिचालन सुनिश्चित करना था। ऐसे में बस स्टैंड के बाहर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। अदालत के आदेश होने के कारण रोडवेज कर्मचारियों निजी बसों के बूथ पर लगाने का विरोध तो नहीं किया, लेकिन रोडवेज बसों का चक्का जाम कर दिया।
नई परिवहन नीति पर है विवाद
रोडवेज कर्मचारियों के अनुसार नई परिवहन नीति रोडवेज को तबाह कर रही है। इसको लेकर सरकार से बातचीत भी हो चुकी है, लेकिन बात नहीं बन रही है। रोडवेज कर्मचारियों के अनुसार बातचीत में सहमति क बावजूद सरकार निजी बसों को चला रही है। ऐसे में आंदोलन जारी रहेगा।
नरवाना में भी बस सेवा बाधित
नरवाना डिपो के कर्मचारियों ने नई परिवहन नीति को लेकर तीसरी बार चक्का जाम किया। वीरवार को रोडवेज कर्मचारियों ने स्टेट परमिट पॉलिसी के विरोध में सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। हड़ताल के चलते यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। यात्रियों को अपने गंतव्य जाने के लिए घंटो बस का इंतजार करना पड़ा। महासंघ के ब्लाक सचिव रामनिवास ने बताया 2016 स्टेट परमिट पालिसी को सरकार ने वापस लेने का वायदा किया था लेकिन सरकार अपने वायदों से मुकर रही है। रामनिवास ने कहा कि एक तरफ तो सरकार वायदा करती है कि रोडवेज का निजीकरण नही किया जाएगा लेकिन दूसरी ओर चोर दरवाजे से परिवहन बसों का टाइम टेबल जारी कर दिया। रोडवेज कर्मचारियों ने कहा कि जब तक सरकार उनकी मांग पूरी नहीं करती बसों का संचालन नहीं करने देंगे। कर्मचारी जसमेल, ईश्वर, दलबीर, वीरेंद्र, जगदीप, सत्यवान, सुखदेव, विरेंद्र ने कहा कि जब तक परिवहन समिति का संचालन बंद नही होता है तब तक रोडवेज की बसों का संचालन नही करेंगे। जिसकी जिम्मेवारी प्रशासन की होगी।
13 मई को सरकार के साथ बातचीत हुई थी। इसमें सरकार ने साफ किया था कि नई परिवहन नीति को रद्द करने के लिए अदालत में प्रयास किया जाएगा। इसके विपरीत सरकार ने नई नीति को वापस लेने की बजाए, इसका समर्थन किया है। अदालत के आदेश सम्मान है, लेकिन सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे मेें नई बसों का परमिट रद्द होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
-अजीत नहरा, प्रधान रोडवेज यूनियन