जींद बस स्टैंड पर बसों का इंतजार करते यात्री।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो जींद।
रोडवेज में निजीकरण के मुद्दे पिछले करीब एक माह में तीन बार रोडवेज का चक्का जाम हो चुका है। इसका खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ता है। वीरवार को निजी बस ऑपरेटरों ने अपनी बस सुबह आठ बजे बस स्टैंड में लगा दी, जिसके विरोध में रोडवेज कर्मचारियों की संयुक्त संघर्ष समिति ने चक्का जाम कर दिया। इससे दिन भर यात्री बेहाल रहे। इस मामले में परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार के हस्तक्षेप और डीसी विनय सिंह ने मध्यस्थता के बाद शाम करीब सात बजे बसों को परिचालन शुरू हो पाया।
जिले में 16 रूटों पर 64 निजी बसों को नई परिवहन नीति के तहत परमिट जारी किए गए हैं। रोडवेज कर्मचारी यूनियन के नेताओं के अनुसार प्रदेश सरकार ने अब अदालत में नई परिवहन नीति रद्द करने की बात कही है। इस पर 16 मई को सुनवाई होनी है, लेकिन निजी बस ऑपरेटरों ने वीरवार को ही अपनी बस सुबह आठ बजे बस स्टैंड में लगा दी। सुबह निजी बस संचालकों के बस स्टैंड में बस लाने के खिलाफ रोडवेज कर्मचारियों ने विरोध जताते हुए नारेबाजी की और निजी बस संचालकों की बसों को रोक दिया। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच विवाद भी हो गया। इसके चलते दिन भर यात्री हलाकान रहे। भयंकर गर्मी के कारण काफी लोगों को घंटों बस स्टैंड पर इंतजार करना पड़ा। कुछ लोग बस नहीं मिलने के कारण वापस घरों को लौट गए। वहीं शाम के समय डीसी विनय सिंह के साथ रोडवेज कर्मचारी संघर्ष समिति के नेता वीरेंद्र सिंह धनखड़, इंद्र सिंह, दलबीर किरमारा, अनूप सहरावत, बलराज देशवाल, आजाद सिंह मलिक, हरिनारायण शर्मा और बाबूलाल सहित कई नेता शामिल हुए।
तीन दौर की बातचीत में बनी सहमति
रोडवेज कर्मचारियों के चक्का जाम करने के एलान के साथ ही एडीसी आमना तस्नीम ने कर्मचारी नेताओं और निजी बस संचालकों से बातचीत की, लेकिन सहमति नहीं बनी। दोपहर बाद डीसी विनय सिंह बस स्टैंड पहुंचे और दो दौर की बातचीत के बाद तय हुआ कि 16 मई तक निजी ऑपरेटरों की बस बस स्टैंड और इसके आसपास नहीं जाएंगी।
जबरदस्ती कर रहे हैं निजी ऑपरेटर
निजी ऑपरेटर जबरदस्ती कर रहे हैं। 16 मई को पूरे मामले पर अदालत में सुनवाई होनी है, लेकिन इन लोगों ने पहले ही बस स्टैंड में बस लगा कर मामले को भड़काया है। 16 को ही कर्मचारी यूनियनों की बातचीत परिवहन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव से भी होगी। इसमें निजी बसों के परमिट रद्द करने की मांग उठाई जाएगी। -वीरेंद्र धनखड़, सदस्य रोडवेज संयुक्त संघर्ष समिति।