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पुलिस ने जनस्वास्थ्य विभाग के कार्यालय में की छापामारी

Tue, 22 Nov 2016 12:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, जींद
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जनेवास्थ्य विभाग के जेई कार्यालय में रखी अलमारियों को खंगालती पुलिस। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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जनस्वास्थ्य विभाग के एसडीओ कार्यालय में ठेके पर लगे कर्मचारियों को पुराने नोटों के माध्यम से वेतन देकर ब्लैकमनी को व्हाइट करने की सूचना पर सोमवार दोपहर को पुलिस ने छापामारी की। पुलिस को सूचना मिली थी कि एसडीओ कार्यालय में ठेके पर लगे कर्मचारियों को लगभग 25 लाख रुपये के पुराने नोट से वेतन दिया जा रहा है। इसकी सूचना मिलते ही डीएसपी कप्तान सिंह के नेतृत्व में पुलिस ने जेई के कार्यालय पर छापेमारी की।
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जहां पर जेई कार्यालय में कोई नहीं मिला। इसके बाद पुलिस ने उसी कार्यालय में डेरा डाल दिया और अलमारी की चाबी लाने के लिए कहा। लगभग एक घंटे के बाद एसडीओ जगदेव सिंह मोर अलमारियों की चाबी उपलब्ध करवाई। इसके बाद डीएसपी कप्तान सिंह, एसडीओ जगदेव मोर के सामने अलमारियों को खोला गया। जहां पर जेई के कार्यालय में रखी लगभग आधा दर्जन अलमारियों को खंगाला, लेकिन अलमारियों से पुलिस ने कोई करेंसी नहीं मिली।


पुलिस के अनुसार सोमवार दोपहर को सूचना मिली कि जनस्वास्थ्य विभाग में ठेके प्रथा के तहत लगे कर्मचारियों को लगभग चार माह से वेतन नहीं मिला है। एसडीओ कार्यालय में इस वेतन को पुराने नोटों के माध्यम से जारी किया जा रहा है।
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जो कि योजनाबद्ध तरीके से ब्लैकमनी को व्हाइट किया जा रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आ गई और शहर थाना प्रभारी नरसिंह, सिविल लाइन चौकी प्रभारी कुलवंत सिंह ने अचानक कार्यालय पर छापामारी की। पुलिस की छापामारी की सूचना मिलते ही जेई कार्यालय में मौजूद कर्मचारी वहां से गायब हो गए। पुलिस ने मौके से जनस्वास्थ्य विभाग में ठेके पर लगे दो कर्मचारियों से पूछताछ की। जहां पर सामने आया कि उनको कुछ नोट पुराने दिए गए हैं। इसके बाद पुलिस का शक ज्यादा गहरा गया। पुलिस ने जब कार्यालय के अलमारियों को खोलने के प्रयास किया तो वह लॉक मिली।

इसके बाद पुलिस ने अलमारियों की चाबी लाने के लिए कहा। लगभग एक घंटे के बाद एसडीओ जगदेव सिंह मोर ने अलमारियों की चाबी लगाकर उपलब्ध करवाई। जहां पर एक-एक करके अलमारियों को खंगाला, लेकिन वहां पर कोई भी करेंसी नहीं मिली। इसके बाद पुलिस ने एसडीओ कार्यालय के जेई सतीश कुमार नैन से इसके बारे में जानकारी ली, लेकिन उन्होंने बताया कि उनके द्वारा पुराने नोट से कोई राशि नहीं दी है, बल्कि कार्यालय में ठेकेदार आए थे। ठेका प्रथा पर लगे कर्मचारियों को वेतन की बजाए खर्च के तौर पर कुछ पैसे दिए थे। इसमें उसकी कोई संलिप्तता नहीं है। वेतन बांटना उनके कार्यालय का भी कोई काम नहीं है। कार्यालय से करेंसी नहीं मिलने के बावजूद भी पुलिस मामले को संदिग्ध तौर पर देख रही है और उसकी जांच को आगे बढ़ा दिया है।
 
दो कर्मियों के बयान दर्ज किए
पुलिस ने छापामारी के दौरान ठेका प्रथा के तहत लगे दो कर्मचारी पैसों के साथ मिले। जहां पर पुलिस ने दोनों के बयान दर्ज किए। पुलिस के अनुसार एक कर्मचारी ने बताया कि उनको चार हजार रुपये तथा दूसरे ने बताया कि उसे केवल तीन हजार रुपये खर्चे के तौर पर दिए गए हैं। पुलिस ने उनके बयान को दर्ज करके जांच को आगे बढ़ा दिया है।

सर्च अभियान चलाने के लिए एसडीएम से ली परमिशन
जेई की अलमारी में लगभग 25 लाख रुपये की नकदी होने के शक के चलते पुलिस ने सर्च अभियान चलाने का फैसला लिया। पुलिस ने कार्यालय में सर्च अभियान चलाने के लिए एसडीएम सतबीर सिंह कुंडू के समक्ष प्रार्थना पत्र दिया। वहां से सिविल लाइन चौकी प्रभारी कुलवंत सिंह के नेतृत्व में कार्यालय में सर्च अभियान चलाने की परमिशन दी गई। इसके बाद पुलिस ने डीएसपी कप्तान सिंह, एसडीओ जगदेव मोर के सामने कार्यालय की अलमारियों को खंगाला।

पिछली और अगली ट्रांजेक्शन को खंगालेगी पुलिस
जनस्वास्थ्य विभाग के कार्यालय के अंदर करेंसी नहीं मिलने के बाद छापामारी करने वाले पुलिस अधिकारियों ने एसपी वसीम अकरम के सामने रिपोर्ट प्रस्तुत की। एसपी ने मामले को यहीं पर बंद करने की बजाए जांच को आगे बढ़ाने के आदेश दिए। एसपी ने शहर थाना पुलिस को आदेश दिए कि वह जांच करे कि जनस्वास्थ्य विभाग के खाते व ठेकेदार के खाते में पिछले तीन चार दिन में हुई ट्रांजेक्शन व अगले तीन-चार दिन में विभाग की तरफ से ट्रांजेक्शन होनी है उसकी जांच की जाए। अगर उसमें कोई गड़बड़ी मिलती है तो कठोर कार्रवाई की जाए।

ठेकेदार ने कहा पेट्रोल खर्च के लिए दिए थे पैसे
पुलिस की कार्रवाई के बाद जनस्वास्थ्य कर्मचारी ठेकेदारों को साथ लेकर एसपी वसीम अकरम से मिलने के लिए उनके कार्यालय में पहुंचे। जहां पर एसडीओ कार्यालय के कर्मचारियों ने एसपी को बताया कि ठेका प्रथा पर लगे कर्मचारियों को कुछ खर्च की जरूरत थी और ठेकेदार पर लगातार दबाव बना रहे थे।

इसके कारण ठेकेदार ने कर्मचारियों को बताया कि उसके पास तो पेट्रोल खर्च के लिए कुछ राशि पुराने नोटों की पड़ी है, लेकिन कर्मचारी खर्च के तौर पर पुराने नोट लेने के लिए तैयार हो गए। इसके कारण ठेकेदार जेई कार्यालय में पहुंचकर दो-तीन कर्मचारियों को केवल खर्च के लिए कुछ पैसे दिए थे। इसमें जनस्वास्थ्य विभाग के जेई का कुछ भी लेना देना नहीं है।

ठेकेदार ठेका प्रथा पर लगे कर्मचारियों को जेई के सामने ही पैसे देता है, क्योंकि ठेके पर लगे कर्मचारी गुमराह न कर सके। इसलिए आज भी कुछ कर्मचारियों का खर्च के तौर पर पैसे दिए थे। लेकिन एसपी वसीम अकरम ठेकेदार और कर्मचारियों की इस दलील पर सहमत नहीं हुए और उनके सामने ही पुलिस अधिकारियों को गंभीरता से जांच करने के आदेश दिए।

मामला दर्ज नहीं, होगी जांच
ठेकेदार व विभाग के खातों की जांच की जाएगी। खातों की जांच के बाद ही आगामी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल इस मामले में कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है।  - कुलवंत सिंह, इंचार्ज सिविल लाइन चौकी
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