शिक्षा विभाग के 32 क्लर्कों के दोबारा टाइप टेस्ट नहीं लेने की मांग को लेकर हरियाणा एजूकेशन मिनिस्ट्रीयल स्टाफ एसोसिएशन ने एडीसी आमना तस्नीम से मुलाकात की। एसोसिएशन ने कहा कि लिपिकों का टाइप टेस्ट एक अधिकारी द्वारा नहीं, कमेटी द्वारा लिया गया है।
ऐसे में दोबारा टेस्ट का कोई मतलब नहीं बनता। एडीसी ने जांच के बाद उचित कार्रवाई का भरोसा दिया है।
एसोसिएशन के प्रधान देवेंद्र सिंह खूंगा के अनुसार 2012 में 32 क्लर्कों की नियुक्ति हुई थी। इसके बाद वार्षिक वेतनवृद्धि के लिए इनका 2014-15 में टाइप टेस्ट लिया गया। टेस्ट में सभी उम्मीदवार उत्तीर्ण भी हुए थे। इसके बाद किसी ने तत्कालीन डीईओ पर पैसे लेकर टेस्ट पास करवाने की शिकायत की है। इसके आधार पर ही एडीसी दोबारा टाइप टेस्ट करवा रहीं हैं, जो गलत है। गौरतलब है कि 21 अगस्त को दोबारा टाइप टेस्ट की तारीख निर्धारित की गई है।
अतार्किक है टेस्ट
देवेंद्र खूंगा के अनुसार अब टेस्ट लेना अतार्किक है। उन्होंने बताया कि स्कूलों में न तो सारा काम हाथ से ही किया जाता है। यहां न तो कंप्यूटर की व्यवस्था है और न ही बिजली की। ऐसे में जिन लोगों की टाइप स्पीड उस समय अच्छी थी, वे दोबारा उतना अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाएंगे।
भ्रष्टाचार के आरोप में निलंबित हैं डीईओ
जींद के पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी जोगेंद्र सिंह हुड्डा भ्रष्टाचार के आरोपों में निलंबित चल रहे हैं। उनके कार्यकाल में ही टाइप टेस्ट हुए थे। ऐसे में एक व्यक्ति ने टाइप टेस्ट में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए जांच की शिकायत एडीसी को दी है।
प्रशासन को पहले मामले की जांच करनी चाहिए। यदि इसमें गड़बड़ी पाई जाती है, तो एसोसिएशन क्लर्कों का साथ नहीं देगी। लेकिन बिना जांच के ही टाइप टेस्ट करवाना गलता है। इसका विरोध किया जाएगा।
देवेंद्र खूंगा, प्रधान हरियाणा एजूकेशन मिनिस्ट्रीयल स्टाफ एसोसिएशन।
अभी जांच जारी
अभी मामले की जांच चल रही है। कुछ भी कहना जल्दबाजी होगा। जांच के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उन्हें सार्वजनिक किया जाएगा।
आमना तस्नीम, एडीसी।