बेशक सरकार लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं देने की बात कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत इससे मेल नहीं खा रही। एक और जहां चिकित्सकों का टोटा है, वहीं रसूखदार चिकित्सक और अन्य कर्मचारी मर्जी से ड्यूटी करते हैं। इसका खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ता है। यह स्थिति है डाहौला गांव स्थित पीएचसी की। कहने को तो यहां हर सुविधा है, लेकिन छह गांवों के मरीजों को सिर्फ एक फार्मासिस्ट का ही सहारा है।
डाहौला पीएचसी के जिम्मे डाहौला के अलावा पेगां, शामदो, चुहड़पुर, नगूरां और बधाना गांव के लोगों का भी इलाज करना है। लेकिन पीएचसी की ही व्यवस्था बीमार हो चली है। पीएचसी में एमओ से लेकर बीडीएस, सुपरवाइजर, लैब टेक्नीशियन और एएनएम तक के पद खाली पड़े हैं। ऐसे में पीएचसी में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को सिर्फ धक्के ही मिलते हैं। पिछले लंबे समय से चल रही ऐसी व्यवस्थाओं के कारण अब तो आसपास के गांवों के मरीज भी पीएचसी का रुख नहीं कर रहे हैं। सिर्फ डाहौला गांव के कुछ लोग ही यहां इलाज के लिए आते हैं।विडंबना देखिए की स्वास्थ्य विभाग द्वारा दिखाने के लिए दर्जन भर से भी ज्यादा पद स्वीकृत किए गए हैं, लेकिन विभाग के जिला सेवा के लिए कोई नहीं है।
यह है हकीकत
पीएचसी में एमओ भी कार्यरत हैं, लेकिन उन्हें डेपुटेशन पर नागरिक अस्पताल जींद में भेजा गया है। पीएचसी में एलएमओ का पद खाली है। बीडीएस का पद खाली है। एलटी लंबी छुट्टी पर चल रहा है। दो सुपरवाइजर हैं, इनमें से एक की सेवाएं नागरिक अस्पताल जींद में ली जा रही हैं। चार चतुर्थश्रेणी कर्मचारी होने चाहिए, लेकिन एक ही कार्यरत है। यहां तीन एएनएम होनी चाहिए, लेकिन एक एएनएम की ही सेवाएं हैं।
फार्मासिस्ट ही मरीजों के लिए चिकित्सक
बेशक स्वास्थ्य विभाग समय-समय पर झोला छाप चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई करता है, लेकिन विभाग में ही व्यवस्था तार-तार है। डाहौला पीएचसी में बिना चिकित्सक के ही मरीजों को दवा दे दी जाती है। यहां फार्मासिस्ट ही आने वाले मरीजों के लिए चिकित्सक का काम करता है।
एक दिन ही आते हैं चिकित्सक
मेरे पेट मे कई दिन से दर्द हो रहा था। परिवार सदस्यों के कहने से मैं पीएचसी चली गई। पीएचसी मे जाने के बाद पता चला की डॉक्टर तो सिर्फ एक दिन ही आते हैं। बाकी दिन वह जींद ही बैठते हैं। यह सब सुनकर बड़ा दुख हुआ। डॉक्टर को पीएचसी में ही बैठाकर लोगों को सेवाएं देनी चाहिए।
पूनम, डाहौला निवासी
मैं अपना चेकअप करवाने के लिए पीएचसी मे गई थी। वहां जाने पर पता चला कि यहां पर न तो डॉक्टर है और न ही यहां पर टेस्ट करने वाला। हमें जींद के अस्पताल में अपना इलाज करवाने की सलाह दी गई है। फिर गांव में पीएचसी का क्या फायदा हुआ। शहर जाने के लिए एक मरीज को एक आदमी साथ चाहिए और पूरा दिन लग जाता है।
पूजा, डाहौला निवासी
अधिकारियों को करवाया है अवगत
डहौला पीएचसी में स्टाफ की दिक्कत है। इससे लोगों को भी परेशानी हो रही है। इसके लिए अधिकारियों को अवगत करवाया गया है। जल्द ही व्यवस्था ठीक कर दी जाएगी।
डॉ. ज्योति मल्होत्रा, एसएमओ कंडेला सीएचसी।