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आधा घंटे से अधिक देर तक एंबुलेंस के इंतजार में तड़पता रहा मरीज

Wed, 14 Sep 2016 12:27 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, जींद
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नागरिक अस्पताल के बाहर स्ट्रेचर पर एंबुलेंस का इंतजार करते घायल मनोहर दास। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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भले ही सरकार द्वारा सरकारी अस्पतालों में बेहतर सुविधाएं मुहैया होने का दावा किया जा रहा हो, लेकिन जींद के नागरिक अस्पताल में सुविधाओं की कलई खुल रही हैं। एक सप्ताह के अंदर दूसरी बार बदहाल एंबुलेंस सेवा की पोल खुली है।
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सड़क दुर्घटना में घायल बराड़ खेड़ा निवासी रवींद्र को सड़क दुर्घटना में घायल होने पर नागरिक अस्पताल लगाया गया। दरअसल गोहाना से लौट रहे बराड़ खेड़ा निवासी 50 वर्षीय रवींद्र की बाइक का संतुलन भंभेवा गांव के पास बिगड़ गया। इसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गया। रवींद्र को हाथ पांव के साथ-साथ सिर में भी चोट लगी थी। ऐसे में नागरिक अस्पताल में हड्डियों का चिकित्सक भी नहीं होने के कारण मनोहर दास को पीजीआई रेफर कर दिया गया। हैरानी की बात है कि रवींद्र का एक्स रे तक नहीं हुआ।

सिर्फ रोहतक पीजीआई के लिए रेफर कर यहां के चिकित्सकों ने अपना पल्ला झाड़ लिया। ऐसा नहीं है कि पहली बार जिला में एंबुलेंस सेवा की पोल पहली बार खुली हैं। छह सितंबर को भी सीबीआई के जज जगदीप सिंह ने ईक्कस गांव के पास जब कुछ घायल युवकों को देख तो तो उन्होंने एंबुलेंस को फोन किया था। इस पर जज को जवाब मिला कि एंबुलेंस उड़कर नहीं आएगी। इसके बाद हालांकि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों जांच की, लेकिन इसके बाद भी एंबुलेंस सेवा सुधरने का नाम नहीं ले रही। एंबुलेंस कंट्रोल रूम के कर्मचारी सुनील कुमार ने बताया कि यहां मौजूद सभी एंबुलेंस मरीजों को लेकर गई हैं। वहीं एक एंबुलेंस खराब होने के कारण देरी हुई। जैसे ही मरीज को रेफर करने की सूचना मिली, सीएचसी खरकरामजी से एंबुलेंस बुला ली गई। इसमें कुछ समय लगा है।
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पांच एंबुलेंस में एक खराब
हालांकि, जिला में करीब डेढ़ दर्जन एंबुलेंस हैं, लेकिन इनमें से पांच की सेवाएं ही नागरिक अस्पताल में ली जा रही हैं। एंबुलेंस कंट्रोल रूप के कर्मचारियों के अनुसार चार एंबुलेंस मरीजों को लेकर गई हैं और एक एंबुलेंस खराब है। यही कारण है कि मनोहर दास को एंबुलेंस सेवा मिलने में देरी हो गई।


 नहीं हो रही सुनवाई
घायल रवींद्र के भतीजे कुलदीप के अनुसार यहां कोई सुनवाई नहीं हो रही है। वे कई बार एंबुलेंस नियंत्रण कक्ष में जा चुके हैं, लेकिन उन्हें कोई रिस्पांस नहीं मिला। वहीं रवींद्र अस्पताल के बाहर एंबुलेंस के इंतजार में दर्द से कराहता रहा। इसके करीब आधे घंटे के बाद सीएचसी से एंबुलेंस बुलाकर रवींद्र को पीजीआई भेजा गया।

ऐसी सूचना नहीं
इस प्रकार की सूचना नहीं है। मरीजों को तुरंत एंबुलेंस मुहैया करवाई जाती हैं। हां, एंबुलेंस को पहुंचने में कुछ समय लग सकता है। यदि ऐसा है तो इसका पता लगाया जाएगा।
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डॉ. संजय दहिया, सिविल सर्जन
 
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