अभी हाल ही कंडेला खाप से अलग 14 गांव की अलग से बनी माजरा खाप को जनप्रतिनिधियों ने मानने से इंकार कर दिया है। माजरा खाप के अंतर्गत आने वाले सभी 14 गांवों के जनप्रतिनिधियों ने कंडेला खाप में आस्था जताई है। गौरतलब है कि पिछले दिनों आरक्षण आंदोलन में हिस्सा नहीं लेने को लेकर खाप आपसी भेदभाव के चलते कंडेला खाप में दो फाड़ हो गई थी। इसमें 14 गांवों के लोगों ने माजरा खाप बनाकर महेंद्र रिढ़ाल को प्रधान बनाया था। रविवार को शहर के एक निजी होटल में 14 गांवों जनप्रतिनिधियों की बैठक हुई।
इसमें नई माजरा खाप के अंतर्गत आने वाले सभी 14 गांव से सरपंच, पंच, ब्लॉक समिति सदस्य, नंबरदार और गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए। बैठक में रुपगढ़, जीतगढ़, पांडू पिंडारा, अशरफगढ़, खोखरी, मांडी खेड़ी, झांजखुर्द, जुलानी और अन्य गांवों के जनप्रतिनिधियों ने माजरा खाप को मानने से इंकार करते हुए कहा कि कुछ चुनिंदा लोगों ने साजिश के तहत कंडेला खाप को तोड़ने का प्रयास किया है। कंडेला खाप के अंतर्गत आने वाले सभी 28 गांवों के 36 बिरादरी के लोग प्रधान टेकराम कंडेला के साथ हैं।
माजरा खाप बनाने की कुछ लोगों की व्यक्तिगत राय थी, जिसका इसके अंतर्गत आने वाले 14 गांवों के लोग समर्थन नहीं करते हैं। इस अवसर पर पूर्व चेयरमैन रामेश्वर सिंह, पूर्व सरपंच रामदिया, भीम सिंह खोखरी, अनिल कुमार, रामपाल, धर्मवीर पिंडारा, सूरजभान पाथरी, सत्यवान नंबरदार, पंच संजीव कुमार मौजूद रहे।
बनाई जाएंगी पंचायती कमेटियां
जनप्रतिनिधियों ने बताया कि जल्द ही खाप के सभी 28 गांवों की मीटिंग बुलाकर पंचायती कमेटियां बनाई जाएंगी। अगर कोई आपसी भेदभाव है, तो उसे बातचीत से दूर किया जाएगा।
खाप को सरपंचों ने नहीं, समाज ने बनाया
माजरा खाप समाज के लोगों ने बनाई है, न कि सरपंचों और पंचों ने। सरपंच और पंच चुने हुए प्रतिनिधि हैं। जिनका काम गांव का विकास करवाना है। खापें आपसी विवाद सुलझवाती हैं। जो लोग आज विरोध कर रहे हैं, उन्हीं लोगों ने अलग खाप बनाने का मुद्दा उठाया था। सरपंचों पर राजनीतिक दबाव डाला जा रहा है। माजरा खाप में 14 गांवों की 36 बिरादरी से 54 सदस्यों की कार्यकारिणी बनाई गई है। जल्द ही खाप को रजिस्टर्ड करवाया जाएगा।
महेंद्र रिढ़ाल, प्रधान
माजरा खाप