एक तरफ तो प्रदेश सरकार शिक्षा को बढ़ावा देने का दावा कर रही है, लेकिन दूसरी तरफ सरकारी स्कूलों में आने वाले विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए मूलभूत सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही हैं। शहर के भिवानी रोड स्थित राजकीय उच्च विद्यालय (बालाश्रम) के विद्यार्थियों को भी पढ़ाई के लिए किसी तरह की मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। यहां पढ़ाई के लिए आने वाले विद्यार्थियों को कक्षाओं में बैठने के लिए बेंच की सुविधाएं तो दूर प्रार्थना सभा के लिए मैदान तक नहीं है। स्कूल में न तो विद्यार्थियों के लिए लैब और लाइब्रेरी की सुविधा है और न ही खेलने के लिए मैदान।
स्कूल का जो भवन है, वह एक स्कूल के लिए भी पर्याप्त नहीं है, लेकिन इस भवन में तीन-तीन स्कूल चल रहे हैं। बरसात के दिनों में तो यहां हालात ओर भी बदतर हो जाते हैं। थोड़ी सी बरसात से ही स्कूल में पानी भर जाता है। किसी भी आधार से यह स्कूल शिक्षा विभाग के मानकों पर खरा नहीं उतरता है, लेकिन इसके बावजूद भी शिक्षा विभाग इस तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहा है। संख्या के मामले में यह स्कूल दूसरे सभी स्कूलों का मात दे रहा है। यहां पढ़ाई के लिए माहौल नहीं मिल पाने के कारण विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है।
छठी से 10वीं तक विद्यार्थियों की संख्या
कक्षा विद्यार्थियों की संख्या
प्रथम 48
दूसरी 64
तीसरी 63
चौथी 90
पांचवीं 76
छठी 140
सातवीं 180
आठवीं 200
नौवीं 170
दसवीं 85
कुल संख्या 1116
नोट : इस संख्या के अलावा प्राइमरी की दूसरी विंग के विद्यार्थियों की संख्या 105 है।
चलते हैं तीन स्कूल
शहर के भिवानी रोड पर चल रहे राजकीय उच्च विद्यालय की जो बिल्डिंग है, वह एक स्कूल के लिए भी पर्याप्त नहीं है लेकिन इस बिल्डिंग में तीन स्कूल चल रहे हैं। यहां पर दो शिफ्टों में स्कूल चलाए जा रहे हैं। पहली शिफ्ट सुबह 7:00 से दोपहर 12:30 तक छठी से 10वीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए तथा दूसरी शिफ्ट दोपहर 12:45 से सायं 6:15 तक प्राइमरी विंग के विद्यार्थियों के लिए। दूसरी शिफ्ट में यहां दो स्कूलों की प्राइमरी की कक्षाएं लगती हैं। एक इसी स्कूल के खुद की प्राइमरी विंग की कक्षाएं लगती हैं तथा दूसरी वाल्मीकि बस्ती की धर्मशाला से स्कूल को बंद करवाने के बाद उस स्कूल की प्राइमरी की कक्षाएं भी यहीं पर लगाई जाती हैं। प्राइमरी की एक विंग में 341 विद्यार्थी हैं, तो दूसरी में 105 विद्यार्थी हैं। स्कूल में 14 कमरे हैं। इसके अलावा स्कूल में 33 टीचर हैं। इनमें 15 जेबीटी, 11 पीजीटी और सात टीजीटी शिक्षक हैं।
न तो साइंस लैब और न ही लाइब्रेरी
स्कूल में आने वाले विद्यार्थियों के लिए यहां न तो साइंस की लैब है और न ही पुस्तकें पढ़ने के लिए लाइब्रेरी की व्यवस्था है। जबकि शिक्षा विभाग के नियमों के अनुसार 10वीं कक्षा तक के स्कूल में फिजिक्स, केमेस्ट्री, बॉयो, ज्यिोग्राफी की लैब तथा एक लाइब्रेरी भी होनी चाहिए।
प्रार्थना के लिए भी नहीं है मैदान
बालाश्रम स्कूल में विद्यार्थियों के खेलने के लिए कोई मैदान नहीं है। स्कूल में खेल का मैदान नहीं होने के कारण यहां ड्यूटीरत पीटीआई अध्यापक विद्यार्थियों को खेल नहीं खिलवा पाते हैं। इससे सही तरह से बच्चों का शारीरिक विकास भी नहीं हो पाता है। खेल के लिए तो दूर यहां प्रार्थना करने के लिए भी मैदान नहीं है। इसके चलते बच्चों को बरामदे में ही खड़े होकर प्रार्थना करनी पड़ती है।
जमीन पर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं विद्यार्थी
बालाश्रम स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या को देखते हुए स्कूल की बिल्डिंग काफी छोटी पड़ती है। इसके चलते विद्यार्थियों को बैठने के लिए कमरे भी नहीं उपलब्ध हो पा रहे हैं। जगह के अभाव के कारण ही बच्चों को बरामदों में जमीन पर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है। एक जगह पर दो-दो कक्षाएं लगने के कारण दोनों कक्षाओं से विद्यार्थियों की आवाज आती रहती है। इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई भी बाधित हो रही है।
यह मामला उच्च अधिकारियों के नोटिस में लाया जा चुका है, लेकिन स्कूल के आस-पास चारों तरफ रिहायसी इलाका है। यहां आस-पास कोई भी दूसरी सरकारी जमीन नहीं है, जहां इस स्कूल को शिफ्ट किया जा सके। स्कूल के पास ही पशुपालन विभाग की ढाई एकड़ जमीन है। यदि सरकार इस जमीन को स्कूल को दे देती है, तो यह जगह स्कूल के प्रयोग में लाई जा सकती है।
वंदना गुप्ता, जिला शिक्षा अधिकारी
जींद