एक ओर जहां सरकार स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार का दावा कर रही है, वहीं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में दवा तक के लाले पड़े हैं। दवा खत्म होने से पीएचसी के अंतर्गत लगने वाले गांवों के मरीजों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। पीएचसी में दवा खत्म होने से ग्रामीणों में स्वास्थ्य विभाग के प्रति गहरा रोष व्याप्त है।
कहने को तो स्वास्थ्य विभाग हर गांव तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ ओर ही है। इसका पता अलेवा की पीएचसी में आने पर चलता है। यहां की व्यवस्था स्वास्थ्य विभाग के दावों की कलई खोल रही हैं। अलेवा की अनीता के अनुसार उसके मुंह पर फुंसियां हो गई हैं। पिछले सप्ताह मंगलवार को वह दवा लेने पीएचसी आई थी। तब उसे दो-तीन दिन में दवा आने की बात कह कर वापस भेज दिया गया। इसके बाद सोमवार को जब वह दवा लेने पहुंची तो वही जवाब मिला। उन्होंने कहा कि पीएचसी में अक्सर कई प्रकार की बीमारियों के लिए दवा खत्म होने के कारण ग्रामीण मरीजों को बाहर के झोलाछाप डॉक्टरों के पास जाना पड़ता है।
पीएचसी के बावजूद नहीं सुविधा
ग्रामीणों के अनुसार गांव में पीएचसी होने के बावजूद उन्हें निजी चिकित्सकों से इलाज करवाना पड़ता है। इस पर काफी पैसे लगते हैं। ऐसे में गांव में पीएचसी होने का कोई लाभ नहीं हो रहा है।
पीएचसी या अन्य स्वास्थ्य केंद्र पर मांग के अनुसार ही दवा मुहैया करवाई जाती हैं। दवाओं का स्टाक ई मेल के माध्यम भेजने पर प्रत्येक माह पीएचसी या उप स्वास्थ्य केंद्र में भेज दी जाती है। अगर अलेवा के एमओ द्वारा दवा लेने के लिए ई मेल डाली गई तो जल्द ही दवा उपलब्ध हो जाएगी।
डॉ. राजेश भोला, एसएमओ सीएचसी कालवा