सीबीआई के जज तक से डांट खाने के बाद भी जिला में एंबुलेंस सेवा की स्थिति नहीं सुधर रही है। सोमवार को भी एंबुलेंस की अव्यवस्था का अलम देखने को मिला, जब एंबुलेंस नहीं पहुंचने पर एक महिला ने अंडों से भरी टेंपो में ही बच्चे को जन्म दे दिया। महिला की डिलीवरी उसके पति के साथ थ्री-व्हीलर चालक ने करवाई। हैरानी की बात है कि महिला को शहर से करीब पांच किलोमीटर दूर ही एंबुलेंस की सेवा नहीं मिल पाई। मध्य प्रदेश के चेंद गांव निवासी महिला और उसके पति साकेत सफीदों से करीब पांच किलोमीटर दूर पानीपत रोड पर पास एक हैचरी में काम करते हैं।
साकेत के अनुसार उसकी पत्नी रेनू को बच्चा होने वाला था। इसके लिए उन्होंने 102 नंबर पर फोन किया तो कुछ देर में एंबुलेंस आने की बात कही गई। काफी देर इंतजार करने के बाद भी जब एंबुलेंस नहीं पहुंची तो दोबारा फोन किया। इस दौरान 102 नंबर से जवाब मिला कि एंबुलेंस एक घंटे में आएगी। आखिर में इंतजार करने के बाद उन्होंने ही अंडों से भरी टैंपो में बैठक कर अस्पताल की ओर रुख किया। अस्पताल पहुंचने से करीब तीन किलोमीटर पहले ही महिला ने बेटे को जन्म दे दिया। साकेत के अनुसार उसने टेंपो चालक की मदद से स्वयं ही डिलीवरी करवाई और जच्चा-बच्चा को नागरिक अस्पताल पहुंचाया।
सीबीआई जज भी लगा चुके हैं फटकार
एंबुलेंस की ऐसी लापरवाही का यह एक माह में चौथा बड़ा मामला है। इससे पहले जब सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति के लिए सीबीआई जज जगदीप सिंह ने एंबुलेंस को फोन किया तो उन्हें जवाब मिला था कि क्या एंबुलेंस उड़कर आएगी। दूसरी घटना में सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को एंबुलेंस न आने के कारण करीब एक घंटे तक तड़पना पड़ा। वहीं कुछ दिन पहले एक युवती को गंभीर हालत में होने के बावजूद एक घंटे तक एंबुलेंस नहीं मिली। इसके बाद युवती को ऑटो से निजी अस्पताल में ले जाया गया।
होगी कार्रवाई
यह मामला संज्ञान में नहीं है। इस मामले में जिस भी व्यक्ति की गलती है, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। ऐसा नहीं होना चाहिए। गर्भवती महिला के लिए प्राथमिकता के आधार पर एंबुलेंस सेवा मुहैया करवाई जाती है।
डॉ. राजेश भोला, एंबुलेंस प्रभारी, नागरिक अस्पताल जींद।