जिले में डेंगू का डंक सिर उठाने लगा है। अभी तक जिले में डेंगू के चार केस सामने आ चुके हैं और इससे लोगों में दहशत है। वहीं डेंगू के डंक पर लगाम लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जागरूकता अभियान शुरू कर दिया है, लेकिन इसका कितना असर होगा, यह समय ही बताएगा। डेंगू के मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग शायद कुंभकर्णी नींद से जाग गया है। विभाग ने लार्वा मिलने पर 42 लोगों को नोटिस दिए हैं। वहीं विभाग बचाव के लिए फॉगिंग शुरू नहीं कर सका है। अधिकारियों का कहना है कि वे वहीं फॉगिंग करेंगे, जहां डेंगू के मरीज मिलेंगे। इससे विभाग के अभियान पर ही सवाल उठ रहे हैं। यानी जिले के अन्य हिस्सों को डेंगू से प्रभावित होने के लिए खुला छोड़ दिया जाएगा। जब वहां पर डेंगू फैलेगा, तब फॉगिंग होगी।
अक्तूबर और नवंबर माह में तेजी से फैलता है डेंगू
चिकित्सकों के अनुसार अक्तूबर और नवंबर माह में डेंगू के फैलने का सबसे अनुकूल मौसम होता है। ऐसे में दो महीने पहले ही डेंगू के मरीज मिलने शुरू हो गए हैं, जो चिंता का विषय है। हालांकि इस बार बारिश भी अधिक नहीं हुई है, इसके बावजूद डेंगू का लार्वा पनप रहा है।
थूआ और पिल्लूखेड़ा पर विभाग की नजर
अब तक सामने आए डेंगू के चार में से तीन केस थूआ गांव में मिले हैं। एक केस पिल्लूखेड़ा मंडी में मिला है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग ने अपना जोर इन दोनों स्थानों पर लगा दिया है।
सिर्फ शहर में मिला लार्वा
यदि डेंगू को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने जरा सी भी लापरवाही की तो शहर में डेंगू का डंक काफी लोगों को अपना शिकार बना सकता है। नोडल अधिकारी डॉ. आरएस तंवर के अनुसार अभी तक विभाग की टीमों को शहर के भिवानी रोड, रोहतक रोड, सब्जी मंडी के आस-पास के क्षेत्र तथा निजी नर्सरियों में डेंगू का लार्वा मिला है।
वर्ष डेंगू के केस
2006 5
2007 4
2008 11
2009 0
2010 1
2011 3
2012 17
2013 48
2014 01
2015 668
2016 04 अब तक
पिछले वर्ष डेंगू से हुई थी आधा दर्जन लोगों की मौत
पिछले वर्ष जिले में डेंगू के 668 केस सामने आए थे। डेंगू के बढ़ते प्रकोप के कारण जिले में करीब आधा दर्जन लोगों की मौत डेंगू के कारण हुई थी।
निजी अस्पताल नहीं करेंगे डेंगू की पुष्टि
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिले में किसी भी निजी अस्पताल के पास डेंगू के एलाइजा टेस्ट की सुविधा नहीं है। ऐसे में निजी अस्पतालों में कार्ड टेस्ट से ही डेंगू की पुष्टि कर मरीजों को परेशान किया जाता है। ऐसे में डेंगू की पुष्टि नहीं करने के लिए निजी अस्पतालों को पत्र लिखा गया है।
डेंगू की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग ने प्राथमिकता के आधार पर अभियान चलाया हुआ है। स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी घर-घर जाकर लोगों को डेंगू के बारे में जागरूक कर रहे हैं तथा घरों में लार्वा की जांच की जा रही है। अभी तक 42 जगहों पर लार्वा मिला है। जिन-जिन मकानों या दुकानों में डेंगू का लार्वा मिला है, उन सभी को नोटिस दिए गए हैं। इसके अलावा विभाग द्वारा लार्वा वाले स्थान पर काला तेल डाला जा रहा है। वहीं निजी अस्पताल संचालकों को भी नोटिस देकर सूचित किया गया है कि वह किसी भी मरीज को डेंगू की पुष्टि नहीं करेंगे। यदि किसी मरीज को डेंगू की संभावना है तो इसकी पुष्टि करने से पहले स्वास्थ्य विभाग को सूचित करेंगे। स्वास्थ्य विभाग द्वारा संभावित मरीज का विभाग की लैब में दोबारा से टेस्ट करवाया जाएगा।
डॉ. आर एस तंवर, नोडल अधिकारी, सामान्य अस्पताल, जींद