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तूने दुत्कार दिया मां, मुझे चाहने वालों की कमी नहीं

Sun, 07 Aug 2016 12:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, जींद
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बच्चे के स्वास्थ्य की जांच करती डॉ. सीमा वशिष्ठ। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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धर्मवीर निडाना। अपने खून के कतरे को झाड़ियों में फेंकने वाली मां ने भले ही बच्चे को दुत्कार दिया हो, लेकिन उसके चाहने वालों की कमी नहीं है। बच्चा शुक्रवार दोपहर बाद मिला और शनिवार दोपहर तक करीब दो दर्जन लोग बच्चे को अपनाने के लिए जिला प्रशासन से संपर्क कर चुके हैं। ऐसे में अस्पताल की नर्सरी में दाखिल दो दिन के बच्चे को नाम भी मिल चुका है। इसके अलावा उसे मां का आंचल और दूध भी मिल गया है। दालमवाला गांव निवासी महिला निक्की बच्चे को अपना दूध पिला रही हैं।
दरअसल जोगेंद्र नगर में लोगों को शुक्रवार दोपहर बाद एक बच्चा लावारिश हालत में झाड़ियों में पड़ा मिला था। इन लोगों ने पुलिस को सूचना दी और बच्चे को अस्पताल लाया गया। यहां आने के बाद अस्पताल स्टाफ ने ही बच्चे का नामकरण भी कर दिया। जिला बाल संरक्षण समिति की चेयरपर्सन योगिता दत्ता के अनुसार तीज के दिन बच्चे का जन्म हुआ है, ऐसे में उसका नाम तेजस रखा गया है।
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बाल संरक्षण कार्यालय पहुंचे महिलाएं
बच्चे को गोद लेने के लिए शनिवार को दो महिलाएं तो बाल संरक्षण कार्यालय तक पहुंच गई। इनमें एक महिला वह है, जिसको बच्चा मिला था। जोगेंद्र नगर निवासी कमलेश देवी के अनुसार भगवान ने बच्चा उसकी झोली में डाला है और इसे भगवान की भेंट समझकर पालना चाहती है। वहीं जोगेंद्र नगर निवासी ही गुड्डी देवी के अनुसार कुछ साल पहले सड़क दुर्घटना में उसके पति व बेटे की मौत हो गई थी अब वह बच्चे को गोद लेकर पालना चाहती है।


करीब 30 लोगों ने किया है संपर्क
बच्चे को उनके पास आए अभी एक ही दिन हुआ है और इस दौरान करीब 30 लोगों ने फोन कर बच्चे को गोद लेने में रुचि दिखाई है, लेकिन इसकी अपनी एक प्रक्रिया है। ऐसे किसी को बच्चा गोद नहीं दिया जा सकता। इन सभी लोगों को प्रक्रिया के बारे में बता दिया है। जैसे ही चिकित्सक बच्चे को अस्पताल से छुट्टी देगा, इसे सोनीपत के शिशु गृह भेज दिया जाएगा।
योगिता दत्ता, चेयरपर्सन जिला बाल संरक्षण समिति


बच्चा पूरी तरह स्वस्थ
बच्चा सांस सही प्रकार से ले रहा है, लेकिन कुछ पीलिया की दिक्कत है। इसका उपचार किया जा रहा है। बच्चों में यह बीमारी सामान्य होती है। बच्चा स्वस्थ है।
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डॉ. सीमा वशिष्ठ, बाल रोग विशेष


मुझे मिली अनोखी खुशी
मैंने भी अपने बच्चे को जन्म दिया है। जैसे ही मुझे पता चला कि अस्पताल में एक अनाथ बच्चा आया है, मैं उसे दूध पिलाने को राजी हो गई। बच्चे को मां का आंचल देकर मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा है।
निक्की, दालमवाला
 
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