एक जुलाई से शुरू हो रहे गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) के प्रचार के लिए कराधान विभाग ने सोमवार को रानीतालाब के पास व्यापारियों के लिए सम्मेलन का आयोजन किया। इस दौरान व्यापारियों ने कराधान विभाग के अधिकारियों से पूछा कि जो लोग पक्के में काम नहीं कर रहे हैं, विभाग उन पर कैसे कार्रवाई करेगा। हालांकि कराधान विभाग के अधिकारी सिर्फ जीएसटी के प्रचार और व्यापारियों को पंजीकरण करवाने के लिए प्रेरित करने पहुंचे थे, लेकिन यहां व्यापारियों ने अपनी शंकाएं अधिकारियों के समक्ष रखी, जिनमें से अधिकतर का समाधान नहीं हो सका।
दोपहर दो बजे व्यापारियों के लिए सेमिनार का आयोजन किया गया। इस दौरान कराधान विभाग के अधिकारियों जीएसटी के बारे में जानकारियों देनी शुरू ही की थी कि व्यापारियों ने इसको लेकर सवाल शुरू कर दिए। इसमें अधिकतर सवार व्यापारियों के वकीलों ने किए। इनका समाधान नहीं होने पर कराधान विभाग के व्यक्ति ने कहा कि जो सवाल व्यापारियों के आ रहे हैं, उनको नोट कर सरकार तक पहुंचाया जाएगा।
कैसे होगी कार्रवाई
सेमिनार के दौरान व्यापारियों का सबसे बड़ा सवाल आया कि जीएसटी के तहत सालाना 20 लाख रुपये तक टर्नओवर वाले व्यापारियों को रजिस्ट्रेशन करवाना है। लेकिन जो लोग इससे कम कारोबार करते हैं और पक्के में काम नहीं करते, वे प्रतिस्पर्धा में पक्के में काम करने वाले व्यापारियों के लिए सिरदर्द बने हैं। व्यापारी कुंज बिहारी जिंदल ने सवाल को उठाया तो सभी व्यापारियों ने इसका समर्थन किया। इस पर कराधान विभाग के अधिकारियों ने कहा कि व्यापारी ऐसे लोगों की शिकायत करें। इस पर व्यापारियों ने कहा कि यदि वे शिकायत करते हैं तो विभाग के अधिकारी ही बता देते हैं कि शिकायत किसने की है। ऐसे में व्यापारियों का आपस में झगड़ा होता है।
अधिकारी बोले, अब फ्रॉड कर नहीं भाग सकेंगे लोग
व्यापारियों की शंकाओं पर कराधान विभाग के अधिकारियों ने कहा कि 15 अंकों के जीएसटी नंबर में 10 नंबर पैन नंबर के होंगे। इसमें व्यापारी का आधार नंबर भी शामिल किया जाएगा। ऐसे में यदि कोई व्यापारी फ्रॉड करता है, तो वह देर-सवेर जरूर पकड़ा जाएगा।
व्यापारी बोले, दुकानें छोड़ करनी पड़ेगी नौकरी
सेमिनार के दौरान व्यापारियों ने कहा कि वे सरकार को कर के रूप में अठन्नी तो देते हैं, लेकिन जो एक पैसा भी नहीं देते उनको जीएसटी के दायरे में कैसे लाया जाएगा। इस पर अधिकारियों ने कोई जवाब नहीं दिया। व्यापारियों ने कहा कि यदि ऐसा चलता रहा तो व्यापारियों को दुकान छोड़कर नौकरी करने पड़ेगी।
सेलर के हाथ में है जीएसटी का हिसाब देना
सेमिनार के दौरान एक व्यापारी ने कहा कि यदि वे दिल्ली के व्यापारी से 20 लाख रुपये का माल खरीदते हैं, तो इस पर जीएसटी का भुगतान दिल्ली के व्यापारी को करना है। यदि वह व्यापारी जीएसटी के पोर्टल पर इसे सही नहीं भरता तो इसका खामियाजा छोटे व्यापारी को भुगतना पड़ेगा। इस पर अधिकारियों ने कहा कि पोर्टल पर जीएसटी-दो ऑप्शन में व्यापारी को ओके करना होगा। यदि व्यापारी इस पर ऑब्जेक्शन लगाता है तो पोर्टल की सूचना के अनुसार गलत जानकारी देने वाले बड़े व्यापारी पर कार्रवाई होगी।
स्टॉक बढ़ाने की मांगी जानकारी
सेमिनार में ज्वेलरी व्यापारी सुमित भारद्वाज ने कहा कि यदि वह अपनी दुकान में 30 लाख रुपये का स्टॉक अभी बढ़ाता है तो उसे एक प्रतिशत कर देना पड़ेगा, लेकिन यदि वह जीएसटी के बाद बढ़ाता है तो इस पर कितना कर बनेगा। इसका कोई जवाब अधिकारियों से नहीं मिला।
व्यापारियों के प्रशिक्षण के साथ-साथ कार्यप्रणाली भी सुधारें अधिकारी
अधिकारियों को जीएसटी के प्रशिक्षण के साथ-साथ अपनी कार्यप्रणाली भी सुधारनी होगी। जो लोग कच्चे में काम कर टैक्स चोरी करते हैं, उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती। यहां तक कि आयकर विभाग भी ऐसे व्यापारियों तक नहीं पहुंच पाता। यदि व्यापारी शिकायत करते हैं तो चोरों को नाम बता दिए जाते हैं। -सुनील वशिष्ठ, रेडीमेड गारमेंट व्यापारी
नहीं मिला जवाब
सेमिनार में मैंने अधिकारियों से एक्साइज ड्यूटी के आधार बेचे गए सामान पर जीएसटी से मिलने वाले लाभ की जानकारी मांगी थी। साथ ही इसको अलग करने के बारे में भी पूछा था, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इससे व्यापारी असमंजस में हैं। -धनराज गोयल, वकील
व्यापारियों की हर शंका का समाधान किया जाएगा। अभी कानून नया है, इसके लागू होने से जो-जो परेशानियां आएंगी, उनके हल भी ढूंढे जाएंगे। सेमिनार में व्यापारियों ने हमारी बात सुनने पहले ही अपने सवाल शुरू कर दिए, इससे भी जीएसटी को समझने में दिक्कत हुई है। इसके लिए दोबारा प्रयास किया जाएगा। -सुरेंद्र कुमार, डीईटीसी