दो साल पहले मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर द्वारा घोषित जींद में बनने वाले मेडिकल कॉलेज के निर्माण में अब पेंच फंस गया है। मेडिकल कॉलेज के लिए साइट फाइनल होने से लेकर बजट में इसका प्रावधान होने के बाद पंचायत की नई शर्तें सामने आ गई हैं। अब ग्राम पंचायत ने मीटिंग कर नया प्रस्ताव पास कर दिया है जिनमें प्रमुख रूप से हर कोर्स में गांव के पांच उम्मीदवारों को शामिल करना है। इसको न मानने पर जमीन न देने का प्रस्ताव रखा है। नए प्रस्ताव को जल्द ही सरकार के पास भेजा जाएगा।
पंचायत की नई शर्तों सामने आने के बाद मेडिकल कॉजेल के निर्माण में रोड़ा अटक गया है। मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च विभाग ने करीब छह महीने पहले ही हैबतपुर गांव की पंचायत की दी गई जमीन को मेडिकल कॉलेज के लिए तय किया था। इसके बाद से मेडिकल कॉलेज के निर्माण की प्रक्रिया भी शुरू हुई, लेकिन अब इस पर ब्रेक लगते दिखाई दे रहे हैं। वहीं मेडिकल कॉलेज के लिए पीडब्ल्यूडी बीएंडआर ने करीब 200 करोड़ रुपये की परियोजना का प्रस्ताव भी मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च विभाग को भेजा है। मेडिकल कॉलेज के संचालन के लिए शुरुआत में 300 बेड के अस्पताल की जरूरत होती है, जबकि जींद में 100 बेड का अस्पताल कार्यरत है। वहीं 100 बेड का अतिरिक्त अस्पताल अभी निर्माणाधीन है, जो दो महीने में तैयार हो सकता है। इसके बावजूद एमसीआई के नॉर्म्स के अनुसार 100 बेड का अस्पताल और चाहिए। फिलहाल इसकी तैयारियां चल रही हैं। इसके तहत स्वास्थ्य शिक्षा विभाग से एमसीआई को लेटर ऑफ प्रपोजल (एलओपी) भेजा जा चुका है। हालांकि स्वास्थ्य शिक्षा विभाग के पास वर्तमान नागरिक अस्पताल की साइट पर ही करीब तीन एकड़ और खुली जमीन है, जहां भवन का निर्माण हो सकता है।
ऐसे में इस साइट को भी एक विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। इसके अलावा हैबतपुर गांव की पंचायत ने भी 24 एकड़, तीन कनाल और तीन मरले जमीन दी है। 100 बेड के अस्पताल के लिए यहां भी विकल्प तलाशे जा रहे हैं। नियमानुसार मेडिकल कॉलेज तैयार होने तक कुल 500 बेड का अस्पताल होना चाहिए। वहीं आगे की योजना के अनुसार भी प्रशासन हैबतपुर की साइट को देख रहा है। मेडिकल कॉलेज के लिए हैबतपुर गांव की पंचायत ने मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च विभाग को जमीन 33 साल के लिए लीज पर दी है। इस पूरी तैयारी के बीच नई शर्तों से मेडिकल कॉलेज का अभी शुरू होने पर संशय बना है।
बनेगा डेंटल कॉलेज भी
मेडिकल कॉलेज के नार्म्स के अनुसार डेंटल कॉलेज भी बनाया जाना होता है। इसके लिए हैबतपुर की साइट को ही प्राथमिकता दी जा रही है। हालांकि हैबतपुर की पंचायत मेडिकल कॉलेज की ओपीडी गांव में चाहती है, लेकिन नागरिक अस्पताल की साइट पर पहले से ही 200 बेड का अस्पताल बना है। ऐसे में यहां जल्द काम शुरू करने के लिए नागरिक अस्पताल की साइट को ही प्राथमिकता दी जा रही है।
पंचायत की शर्तें
1.मेडिकल कॉलेज में आने वाले सभी कोर्सों में पांच सीट गांव के उम्मीदवारों के लिए निर्धारित की जाएं।
2. तीसरे और चौथे दर्जे के कर्मचारियों की भर्ती में 50 प्रतिशत नियुक्ति गांव के युवाओं की हो।
3. कैंटीन और पार्किंग के ठेके से होने वाली आय ग्राम पंचायत को दी जाए। या पार्किंग और कैंटीन का ठेका पूर्ण रूप से पंचायत के अधिकार क्षेत्र में हो।
4. जो जमीन मेडिकल कॉलेज के लिए दी है, वहां डेढ़ एकड़ जमीन गांव के गंदे पानी की निकासी के लिए भी है। यह जमीन देने से गांव के गंदे पानी की निकासी में दिक्कत आएगी। ऐसे में गांव को सीवर लाइन से जोड़ा जाए।
ग्राम पंचायत ने पहले भी अपनी मांगें सरकार और अधिकारियों भेजी थी। अब वीरवार को ग्राम पंचायत ने बैठक कर इन मांगों का प्रस्ताव पास किया है। यह सरकार को भेजा जाएगा। यह मांगें पूरी नहीं होने पर पंचायत ने जमीन नहीं देने का प्रस्ताव पास किया है।
-कश्मीरो देवी, सरपंच, हैबतपुर
यह मामला स्वास्थ्य विभाग नहीं, हेल्थ एजुकेशन एंड रिसर्च विभाग देखता है। ऐसे में जिला स्तर पर इसकी अपडेट नहीं होती। यह मामला सीधा निदेशक कार्यालय से जुड़ा होता है, ऐेसे में मुझे इसकी जानकारी नहीं है। -डॉ. संजय दहिया, सिविल सर्जन