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निजी बस ऑपरेटरों और रोडवेज कर्मचारियों की लड़ाई में पिसी जनता, आज भी नहीं चलेंगी बसे

Mon, 10 Apr 2017 12:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, जींद
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जींद बस स्टैंड पर नारेबाजी करते रोडवेज कर्मचारी। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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आरटीए ऑफिस द्वारा चार नई बसों को परमिट और समय सारिणी जारी करने के विरोध में रोडवेज कर्मचारियों के आंदोलन के दूसरे दिन रविवार को जींद डिपो पूरी तरह बंद रहा। रोडवेज कर्मचारी और निजी बस ऑपरेटरों ने एक दूसरे पर बस रोकने का आरोप लगाते हुए हड़ताल रखी। इससे बस स्टैंड के गेट के बाहर निजी बसें खड़ी रहीं, तो गेट के अंदर रोडवेज बस। इसी प्रकार रोडवेज कर्मचारियों ने बस स्टैंड के अंदर धरना दिया, तो निजी ऑपरेटरों और उनके स्टाफ ने बस स्टैंड के बाहर मोर्चा संभाला। इस सब के बीच अपनी-अपनी मंजिल की ओर जाने वाले यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।


एक दूसरे पर बस रोकने का आरोप लगाते हुए सुबह साढ़े छह बजे बसों के पहिए रोक दिए। रोडवेज कर्मचारियों का कहना है कि निजी ऑपरेटरों ने बस स्टैंड के गेट के बाहर बस रोक कर रोडवेज की बस को बाहर नहीं जाने दिया, जबकि निजी ऑपरेटरों का आरोप है कि रोडवेज कर्मचारियों ने बस स्टैंड के गेट में बस रोक कर उनकी बसों को अंदर नहीं जाने दिया। सुबह ही जरूरी काम के लिए घरों से निकले लोगों को काफी परेशानी का समाना करना पड़ा। कुछ लोग बस स्टैंड की अव्यवस्था देखकर वापस घरों को लौट गए। वहीं रोडवेज कर्मचारियों और निजी ऑपरेटरों का धरना शाम तक जारी रहा।
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यूं शुरू हुआ विवाद
नई परिवहन नीति के तहत जींद के आरटीए ने चार नई बसों को परमिट व समय सारिणी जारी की। इस पर ये बसें शनिवार शाम को बस स्टैंड पहुंची, जहां रोडवेज कर्मचारियों ने इनका विरोध शुरू कर बस स्टैंड के गेट बंद कर दिए। तब प्रशासन ने दोनों पक्षों को शांत करवा दिया। रविवार सुबह फिर से दोनों के बीच यही विवाद शुरू हो गया।

दिन भर चला बातचीत का दौर
मामले में हस्तक्षेप करते हुए डीसी विनय सिंह ने अधिकारियों को मौके पर जाने के आदेश दिए। इसके बाद एडीसी आमना तस्नीम, सिटीएम राकेश कुमार और डीएसपी कप्तान सिंह बस स्टैंड पहुंचे और दोनों पक्षों से बातचीत की, लेकिन बात सिरे नहीं चढ़ पाई। इसके बाद डीसी विनय सिंह ने शाम को रोडवेज यूनियन के नेताओं ने बात की। पहले दौर की बात के बाद रोडवेज कर्मचारी बाहर आए तो सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन दूसरे दौर की बातचीत शुरू होते हुए रोडवेज कर्मचारियों ने डीसी विनय सिंह से मांग की कि पहले नई बसों के परमिट और समय सारिणी रद्द हो इसके बाद ही आगे की बातचीत होगी। इस पर डीसी विनय सिंह ने पॉलिसी का हवाला दिया तो रोडवेज कर्मचारी बातचीत से पीछे हट गए।

भटकते रहे यात्री
सुबह से ही रोडवेज तथा निजी ऑपरेटरों की बस बंद होने के कारण यात्री भटकते रहे। हालांकि पंजाब रोडवेज सहित कुछ अन्य डिपो की बस गोहाना रोड पर बस स्टैंड के बाहर से चलती रही, लेकिन भीड़ के कारण लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ी।

नहीं मिल रही बस
मुझे जरूरी काम से सोहनगढ़ जाना है, लेकिन बस नहीं मिली। काफी देर से बस स्टैंड के बाहर भी इंतजार किया, लेकिन यहां भी कोई बस नहीं आई। -विजय, यात्री

वापस जाना पड़ेगा घर
सुबह ही जरूरी काम के लिए घर से निकली थी। छुट्टी के दिन परिवार में मिलने जाना था, लेकिन रोडवेज की हड़ताल के कारण अब वापस ही जाना पड़ेगा।  -जगमती, यात्री।

पिल्लूखेड़ा जाने के लिए नहीं मिली बस
मुझे अपने परिवार के साथ पिल्लूखेड़ा जाना था, लेकिन बस नहीं मिली। निजी और रोडवेज बसों की हड़ताल के कारण मैक्सी कैब में भी भारी भीड़ है।  -राजबाला, यात्री।


सरकार रोडवेज को तबाह करने के लिए नियमों को ताक पर रखकर निजी बसों को चला रही है। ऐसा नहीं होने दिया जाएगा। रोडवेज कर्मचारी इसका विरोध करेंगे। -दलबीर ढिल्लों, सदस्य, ज्वाइंट एक्शन कमेटी, हरियाणा रोडवेज।

पूरे विवाद पर प्रशासन के साथ बातचीत हुई है। रोडवेज कर्मचारियों का फैसला है कि नए परमिट और टाइम टेबल वाली बसों को बस स्टैंड के अंदर नहीं घुसने दिया जाएगा। यदि प्रशासन कोई जबरदस्ती करता है, तो प्रदेश भर में चक्का जाम कर दिया जाएगा।
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-धर्मवीर हुड्डा, मुख्य संगठन सचिव, हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन


प्रशासन ने कर्मचारियों को हर प्रकार से संतुष्ट करने का प्रयास किया है। यदि टाइम टेबल में कोई दिक्कत है, तो उसे ठीक किया जा सकता है। यदि निजी बस संचालकों ने कोई गलत कार्रवाई की तो इसकी जांच करने को तैयार हैं। इसके बावजूद सोमवार को बस नहीं चलाने का फैसला लिया है। सरकार को इसकी जानकारी दी जाएगी। -विनय सिंह डीसी, जींद।


 
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