जाट आरक्षण के दौरान हुए नुकसान के आंकलन में प्रशासनिक अधिकारी जुटे हुए हैं। आंकलन के बाद किसी तरीके से आरोप-प्रत्यारोप न लगे इसके लिए प्रशासन ने सभी प्रभावित दुकानों और कार्यालयों की वीडियोग्राफी कराई है। शुक्रवार को भी आंकलन का कार्य जारी रखा, जो शिकायत प्रशासन के पास आई थी उनका आंकलन किया गया। इसमें व्यावसायिक संस्थान रिहायशी संस्थान, रेहड़ी, खोखे और वाहनों की वीडियोग्राफी कराई गई। हालांकि जिले में निजी संपत्ति को नुकसान काफी कम रहा है, लेकिन सबसे ज्यादा नुकसान सरकारी कार्यालयों में हुआ है।
इसमें पिल्लूखेड़ा, जुलाना और अलेवा व उचाना क्षेत्र में सरकारी कार्यालयों में उपद्रवियों ने आग के हवाले कर दिया था। इस दौरान सरकारी कार्यालयों में वर्षों पुराना पड़े रिकार्ड भी आगजनी की भेंट चढ़ गया है। अब प्रशासन आंकलन करने में लगा हुआ है कि आगजनी की इस घटना में कितना रिकार्ड को बनाने में लगा हुआ है।
जिन लोगों के व्यावसायिक, रिहायशी, रेहड़ी, खोखा तथा वाहनों इत्यादि का नुकसान हुआ है, उनके आवेदन फार्म एसडीएम कार्यालय में जमा कराए जा रहे हैं। क्लेम फार्म में अनुमानित नुकसान को भी दर्शाना होगा। इसके लिए एफआईआर की कॉपी, नष्ट हुई संपत्ति अथवा वाहन की तस्वीरें, संपत्ति अथवा वाहन का मालिकाना साबित करने वाले दस्तावेज मांगे जा रहे हैं।
आवेदन करने की अंतिम तिथि कल
डीसी विनय सिंह ने बताया कि व्यावसायिक, रिहायशी, रेहड़ी, खोखे और वाहनों के नुकसान के लिए क्लेम फार्म एसडीएम कार्यालय से लिए जा सकते हैं। फार्म जमा कराने का 27 फरवरी का दिन आखिरी है। लोगों की सुविधा के लिए छुट्टी के दिन भी एसडीएम कार्यालय खुला रहेगा। अगर किसी व्यक्ति को एफआईआर इत्यादि दर्ज कराने में किसी प्रकार की दिक्कत आती है तो वह एसडीएम कार्यालय में इसके बारे में सूचित करे, ताकि समय रहते उचित कार्रवाई की जाए सके।
उपद्रवियों की पहचान बंद लिफाफे में मांगी
जाट आरक्षण आंदोलन की आड़ में उपद्रव मचाने वाले लोगों का पता लगाने के लिए पुलिस जुट गई। इसके लिए जनता से व्हाट्सएप के माध्यम से उपद्रव की वीडियो मांगी जा रही है, ताकि उपद्रवियों की पहचान हो सके। इसके अलावा पुलिस ने लोगों से बंद लिफाफे में भी अपनी शिकायत एसएसपी कार्यालय में भेजने की अपील की है। पुलिस का कहना है कि उपद्रवियों की सूचना देने वाले प्रत्येक व्यक्ति की पहचान को गुप्त रखा जाएगा।
एडीजीपी से मिले शहर के लोग
आंदोलन के दौरान आगजनी व लूटपाट की वारदातों को अंजाम देने वाले उपद्रवियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर शहर के सीनियर सिटीजन और व्यापारी वर्ग के लोग एडीजीपी डा. बीके सिन्हा से मिले। जहां पर जल्द से जल्द उपद्रवियों की पहचान करके उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की। हालांकि इस दौरान सीनियर सिटीजन तथा व्यापारियों ने आंदोलन के दौरान जींद शहर में कोई बड़ी घटना नहीं होने देने पर एडीजीपी डा. बीके सिन्हा, डीसी विनय सिंह, एसएसपी अभिषेक जोरवाल, आर्मी अधिक ारी का धन्यवाद किया।
किसी भी आरोपी को नहीं बक्शा जाएगा
एडीजीपी डा. बीके सिन्हा ने कहा कि जाट आंदोलन की आड़ में दंगा, लूटपाट व आगजनी करने के आरोपियों के खिलाफ अब तक 52 मामले दर्ज किए गए हैं। ऐसे लोगों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। भीड़ में किन उपद्रवियों ने ऐसा खेल खेला उनकी पुलिस वेरिफिकेशन करके उन्हें सलाखों के पीछे डालने का काम करेगी।
उन्होंने कहा कि आरक्षण की मांग के लिए तो कुछ प्रतिशत ही थे, लेकिन उनकी आड़ में आकर जींद शहर में उत्पाद करने वाले उपद्रवी थे जो समाज के ताने बाने को कमजोर करना चाहते थे लेकिन उनके मनसूबों को नाकाम कर दिया। प्राथमिकता के आधार पर उन असामाजिक तत्वों को हिरासत में लेकर बेनकाब किया जाएगा जिन्होंने इस घटना को अंजाम दिया हैं।