धरने पर नारेबाजी करती महिलाएं।
- फोटो : bureau
जाट आरक्षण आंदोलन के तहत चल रहे धरने समाप्त करवाने के लिए सरकार ने खटकड़ गांव में धरना दे रहे जाट नेताओं को बातचीत के लिए संदेश भेजा है, लेकिन जिला कमेटी ने इस प्रकार का कोई भी फैसला राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक पर छोड़ दिया है। अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति द्वारा दिए जा रहे धरने के अलावा योजना के अनुसार नरवाना और जुलाना में धरने शुरू नहीं हो सके। जुलाना में धरने की अनुमति लेने के लिए समिति ने वहां धरने की कमान संभालने वाले तीन नेताओं की संपत्ति का ब्यौरा प्रशासन को देने का फैसला लिया है। वहीं खटकड़ गांव के धरने पर इनेलो के जिलाध्यक्ष कलीराम पटवारी रोड जाति के अन्य लोगों के साथ पहुंचे और रोड जाति का समर्थन देने का ऐलान किया। सरकार से बातचीत का संदेश लेकर बृहस्पतिवार दोपहर बाद जिला प्रशासन का प्रतिनिधि खटकड़ गांव में धरना स्थल पर पहुंचा। यहां सरकार से बातचीत का प्रस्ताव रखा गया, लेकिन समिति की जिला कमेटी ने साफ कर दिया कि बातचीत का फैसला उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक ही करेंगे। कमेटी ने कहा कि यदि बातचीत की अध्यक्षता जाटों की तरफ से यशपाल मलिक करेंगे तो ही वे सरकार से बातचीत कर सकते हैं। अब बातचीत की गेंद सरकार के पाले में है।
ये बैठे अनशन पर
बृहस्पतिवार को क्रमिक अनशन पर दिलबाग, अजीत सिंह, कर्म सिंह, विरेंद्र, डॉ. दलबीर बीबीपुर, मास्टर बलबीर सिंह, ईश्वर सिंह आर्य व गजे सिंह ने बैठे। धरने पर पहुंचे लोगों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और मांगें नहीं माने जाने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया।
प्रशासन की ओर से बातचीत का निमंत्रण मिला है, लेकिन हमने अपना पक्ष साफ कर दिया है। जब तक यशपाल मलिक बातचीत की अध्यक्षता नहीं करेंगे, समिति बातचीत में शामिल नहीं होगी।
- कैप्टन भूपेंद्र, जिलाध्यक्ष अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति।