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सरकार के महा अधिवक्ता और उप महाधिवक्ता के खिलाफ जाट विकास एवं कल्याण समिति डालेगी अवमानना की याचिका

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जाट धर्मशाला में रविवार को जाट विकास एवं कल्याण समिति की राज्य स्तरीय बैठक हुई, जिसकी अध्यक्षता प्रधान ओम सिंह सांगवान ने की। बैठक में एसबीसी तथा ईबीपी (जी) कैटेगरी की नौकरियों व दाखिलों में आरक्षण मामले पर चर्चा की गई।
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बैठक में कहा गया कि सरकार के महाधिवक्ता और उप महाधिवक्ता ने उच्च न्यायालय को आदेशों का उल्लंघन किया है। इन दोनों के खिलाफ समिति अदालत में याचिका दायर करेगी। सांगवान ने कहा कि प्रदेश सरकार ने 27 सितंबर 2013 को आरक्षण संबंधी नोटिफिकेशन जारी किया था, परंतु बाद में उच्चतम न्यायालय एसबीसी पर रोक लगा दी, जबकि ईबीपी कैटेगरी की नौकरियों में भर्ती जारी रखी। जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान प्रदेश सरकार ने विधानसभा में एक्ट पास करके उपरोक्त दोनों कैटेगरियों को 10-10 प्रतिशत आरक्षण देने का कानून बनाया, परंतु उच्च न्यायालय ने इस कानून पर रोक लगा दी। कानून पर रोक लगाने के बावजूद भाजपा सरकार ने एसबीसी अर्थात जाट समेत छह जातियों पर रोक लगा दी, परंतु ईबीपी आरक्षण को जारी रखा, जो अभी तक जारी है। इस मामले में अदालत की अवमानना बारे कई बार माननीय उच्च न्यायालय में केस डाले गए, परंतु हर बार सरकार के महाधिवक्ता तथा उप महाधिवक्ता जातिगत भेदभाव से वशीभूत होकर न्यायालय तथा सरकार को गुमराह करके अदालत के आदेशों का उल्लंघन करके ईबीपी के आरक्षण के अंतर्गत नौकरी लगवाने के बारे में गैर कानूनी सलाह देकर न्यायालय की अवमानना करते आ रहे हैं। इन भर्तियों में बहुत बड़ा घोटाला हुआ है और इसमें भ्रष्टाचार की बू आती है।
बैठक में फैसला लिया गया कि वरिष्ठ वकीलों के पैनल से सलाह लेकर महाधिवक्ता तथा उप महाधिवक्ता के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में जनहित याचिका डाली जाए, क्योंकि इनके गलत बयान और गलत सलाह देने की कार्यप्रणाली के कारण एससी, बीसी समेत सभी वर्गों के हकों पर कुठारघात हो रहा है।
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बैठक को वीरभान ढुल, चांदराम मलिक, प्यारे लाल देशवाल, किताब सिंह भनवाला, रामभज पहल, हवासिंह नेहरा, सूबेदार सुभाष, बलबीर सिंह पूनिया, सुनील राठी रोहतक, कृष्ण हिसार, सोमबीर भिवानी, राजकुमार कैथल, कृष्णा देवी सोनीपत, अशोक पूनिया सिरसा, जयभगवान खटकड़, दलजीत सिंह, मदन मलिक ने भी अपने विचार रखे।
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