जाट आरक्षण सहित अन्य मांगों को लेकर ईक्कस गांव में 15 दिन से चल रहे धरने पर अब पक्का मंच बनाया जाएगा। धूप को देखते हुए लोगों के लिए भी टेंट का इंतजाम सोमवार से किया जाएगा। हालांकि, सरकार से बातचीत के बाद सोमवार से धरने बढ़ाने के फैसले को वापस ले लिया गया है, लेकिन 19 फरवरी को बलिदान दिवस बनाने के बाद 20 फरवरी से नरवाना उपमंडल के घसो, जुलाना खंड के गतौली और सफीदों उपमंडल के भंभेवा गांव में धरना शुरू किया जाएगा। वहीं, धरने पर पहुंची कुछ महिलाओं ने सरकार को चेताया कि यदि मांगें नहीं मानी जाती तो गांवों के स्कूलों को बंद कर रोड जाम किया जाएगा।
धरने पर पहुंचे जाट नेताओं ने सरकार के साथ-साथ जाट मंत्रियों पर भी निशाना साधा। इस दौरान भाकियू नेता महेंद्र घिमाना, जिला कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष एडवोकेट बलवान लोहान, गठवाला युवा खाप के प्रधान उत्तर प्रदेश के मुज्जरफरनगर निवासी मित्रपाल सहित कई लोग मौजूद रहे। वक्ताओं ने कहा कि यदि पिछली साल ही जाट मंत्री त्यागपत्र देकर लोगों के साथ आ गए होते तो आरक्षण मिल गया होता, लेकिन उन लोगों को कुर्सी प्यारी लगी, भाईचारा नहीं। पूर्व मंत्री सत्यनारायण लाठर ने कहा कि आने वाले चुनाव में प्रदेश की जनता इन लोगों को सबक सिखाएगी। चोपड़ा खाप नरवाना के प्रधान अमृत चोपड़ा ने कहा कि जाटों को एक या दो नहीं कई बच्चे पैदा करने चाहिएं। दो देश की रक्षा करें, दो अन्न पैदा करें और दो सरकार को तंग करने के लिए हों।
डेयरियों में दूध देना करो बंद
मिलकपुर गांव निवासी कमलेश ने धरने पर पहुंची महिलाओं से आह्वान किया कि वे गांव में दूध डेयरियों में न दें। इससे सरकार पर दबाव बनेगा। हालांकि, अधिकतर महिलाओं ने इस बात का समर्थन नहीं किया। महिलाओं ने कहा कि घर का खर्च कैसे चलेगा।
बुजुर्ग के लिए रखा मौन
शनिवार को धरने के दौरान हर्ट अटैक से मौत होने वाले पाजू खुर्द निवासी कर्ण सिंह के लिए दो मिनट का मौन रखा गया। इस दौरान समिति के जिलाध्यक्ष वीरभान ढुल ने कहा कि सरकार कर्ण सिंह को शहीद का दर्जा दे।
छोटी बच्ची ने किया नेताओं पर कटाक्ष
इस दौरान एक छह वर्षीय बच्ची अक्षिता ने अपनी कविता के माध्यम से नेताओं पर कटाक्ष किया। वो दिन याद करो, जब वोट मांगते हांडो थे। कारां पै बांध कैं धुत्तू, पर्चे बांटते हांडो थे।
रोष जताने के लिए घाघरी का सहारा
धरने के दौरान महिलाओं ने सरकार के खिलाफ रोष जताने के लिए घाघरी का सहारा लिया। महिलाओं ने कहा कि यह घाघरी सरकार के लिए है। यदि सरकार कोई मजबूत फैसला नहीं ले सकती तो फिर उनके लिए घाघरी ही बचती है।
अब धरनों पर ही होगी बात
सरकार के बुलाने पर जाट बातचीत के लिए पानीपत गए, लेकिन जो अधिकारी भेजे गए, वे फैसला नहीं कर सके। ऐसे में अब बातचीत धरनों पर ही की जाएगी। वहीं, घसो, गतौली और भंभेवा में भी 19 फरवरी के बाद धरने दिए जाएंगे। ईक्कस गांव में पक्की स्टेज बना कर लोगों के लिए टेंट लगवाया जाएगा।
कैप्टन रणधीर सिंह, चहल, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य, जाट आरक्षण संघर्ष समिति