डेढ़ साल पहले नेत्रहीन पिता के एक बेटे की कहानी ने हजारों लोगों के जीवन में रोशनी भर दी। पंजाब के सुनाम निवासी भर्तृहरि के पिता संस्कृत के विद्वान थे, लेकिन उनके जीवन के अंतिम दिन अंधता में गुजरे। इस घटना ने भर्तृहरि को झकझोर दिया और लोगों के जीवन में उजाला भरने का प्रण लिया। भर्तृहरि ने 12 साल अभियान चलाया और पूरे सुनाम को अंधता मुक्त बना दिया। अब उनकी इस कहानी से प्रेरित होकर डॉ. विवेक सिंगला लोगों को नेत्रदान के लिए जागरूक कर रहे हैं।
इसी कड़ी में समाजसेवी संस्था सृष्टि फाउंडेशन ने जिले को अंधता मुक्त बनाने के लिए अभियान चलाया है। इसके तहत 2019 तक जिले को अंधता मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है। संस्था के वरिष्ठ सदस्य डॉ. विवेक सिंगल बताते हैं कि करीब डेढ़ साल पहले उनकी मुलाकात सुनाम निवासी भर्तृहरि से हुई। उनके हौसले ने उन्हें काफी प्रभावित किया और उसी से प्रेरणा लेकर संस्थान ने भी यह अभियान शुरू किया है।
चिता में क्यों जलती हैं आंखें
डॉ. विवेक सिंगला बताते हैं कि सिर्फ जानकारी के अभाव में आंखें चिताओं में चल रही हैं। इसको रोकना है। इसके लिए लोगों को प्रेरित किया जाएगा। सिंगला के अनुसार भरतहरि ने बिना संचार सुविधाओं के ऐसा कर दिखाया है, ऐसे में आज के दौर में उनके लिए यह काम आसान है।
नेत्रदान करें लोग
लोगों के जीवन को रोशन करने के लिए जरूरी है कि लोग नेत्रदान करें। इसके लिए व्यक्ति की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग को सूचना देनी होती है। यह आसान सी प्रक्रिया होती है। सबसे अच्छी बात है कि मरने वाले व्यक्ति की आंखें उनके बाद भी दुनिया देख सकेंगी।
48 हजार में आंखों का प्रत्यारोपण
डॉ. सिंगला ने बताया कि यहां आंख प्रत्यारोपण के लिए 48 हजार फीस है। इसके लिए एक चिकित्सक से बात हुई है। लोगों की भी मदद ली जाएगी। पहले आयोजन में 15 लोगों को आंखें लगवाने की राशि एकत्र हो गई है। उम्मीद है कि लोगों का साथ मिलेगा और जींद अंधता मुक्त होगा।
19 को लगेगा कैंप
आंख प्रत्यारोपण के लिए 19 फरवरी को लार्ड शिवा स्कूल में विशाल अंध जांच शिविर का आयोजन किया जाएगा। नयना कार्यक्रम के तहत 19 फरवरी रविवार को सुबह नौ से एक बजे तक आयोजित अंध जांच शिविर में जिलेभर से आए नेत्रहीनों को ग्रुप अनुसार ऑपरेशन के लिए चुना जाएगा।
प्रेम दलाल, अध्यक्ष सृष्टि फाउंडेशन