जींद। क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट दिनेश कटारिया के खिलाफ मिली शिकायत की जांच स्वास्थ्य विभाग ने शुरू कर दी है। जांच पूरी नहीं होने तक उनको काम करने से रोक दिया गया है। वहीं जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने सिविल सर्जन को पत्र लिखकर जांच रिपोर्ट 10 दिन में सौंपने के निर्देश दिए हैं।
मेंटल हेल्थ विभाग में तैनात क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट दिनेश कटारिया के खिलाफ सिविल सर्जन, डीसी, एसपी, स्वास्थ्य सेवाएं महानिदेशक, स्वास्थ्य मंत्री, पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार तथा जींद के जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पास शिकायत भेजी गई है। शिकायतकर्ता हिसार निवासी विकास ने कहा है कि दिनेश कटारिया की नियुक्ति अवैध है। इस पद पर नियुक्ति के लिए क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट का आरसीआई (रीहैबिलेशन काउंसिल ऑफ इंडिया) से पंजीकरण अनिवार्य है, जो उनके पास नहीं है। कटारिया ने इस पद के लिए रोहतक, हिसार, यमुनानगर में भी आवेदन किए थे, लेकिन योग्यता पूरी नहीं होने के कारण वह रद्द हो गए। योग्यता पूरी न होने के बाद भी उनको जींद में नियुक्ति दे दी गई।
सिविल सर्जन ने डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. पालेराम कटारिया, डॉ. विजेंद्र ढांडा, डीपीएम रेनू मिड्ढा, डॉ. अनिल कुमार की कमेटी बनाकर जांच शुरू करवा दी है। वहीं जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने पत्र जारी कर दस दिन में रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा है।
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जुवेनाइल कोर्ट में कैसे हुए पेश, इस पर भी सवाल
मेंटल हेल्थ के क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट जुवेनाइल कोर्ट में पेश होकर बच्चों के मेंथल हेल्थ की रिपोर्ट देते हैं। दिनेश कटारिया आईसीआई से पंजीकृत नहीं हैं तो उनके रिपोर्ट देने पर भी सवाल उठे हैं। अदालत ने इसी कारण रिपोर्ट मांगी है, ताकि पता चले कि वह आईसीआई से पंजीकृत हैं या नहीं। यदि वह रजिस्टर्ड नहीं मिले तो फिर कैसे बच्चों की मेंटल हेल्थ जांच रहे थे। इस पर सवालिया निशान लग रहे हैं। अब जांच रिपोर्ट के बाद ही इसका खुलासा होगा।
दिनेश कटारिया के खिलाफ जांच की जा रही है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश को भी जल्द रिपोर्ट सौंपने के लिए पत्र आया है। दिनेश कटारिया पर जो आरोप हैं, वह काम अब उससे नहीं लिया जा रहा है। दो-चार दिन में जांच करके रिपोर्ट अदालत को सौंप दी जाएगी। -डॉ. गोपाल गोयल, सिविल सर्जन।