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किसानों के मुद्दे को लेकर अलग-अलग लड़ने की बजाए सब मिल कर लड़ें : डल्लेवाल

Tue, 24 Jun 2025 12:44 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
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जींद। जाट धर्मशाला में सोमवार को भारतीय किसान नौजवान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष अभिमन्यु कोहाड़ की अध्यक्षता में प्रदेशस्तरीय बैठक का आयोजन किया गया। यहां प्रदेशाध्यक्ष अभिमन्यु कोहाड़ ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि किसानों की समस्याओं को लेकर सरकार से बातचीत हुई थी। मांगें नहीं मानी गई तो लंबा आंदोलन चला। किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने सभी के सहयोग से सरकार को बातचीत की टेबल पर मजबूर किया गया और फिर उनके साथ सरकार ने धोखा किया।
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सभी आंदोलनकारियों से सिर्फ एक ही चर्चा होती थी कि हमारा सभी का काम करने का तरीका जब एक है तो संगठन एक क्यों नहीं होना चाहिए। वह चाहते हैं कि हम सरदार जगजीत सिंह डल्लेवाल के नेतृत्व में मिलकर काम करें। बैठक में भारतीय किसान नौजवान यूनियन भारतीय किसान यूनियन एकता सिधुपुर में विलय हुई। यहां कैप्टन वेद प्रकाश, करण सिंह खटकड़, सुनील बद्दोवाल सहित अनेक किसान नेता मौजूद रहे।

छात्रों को जरूरत होगी तो देंगे साथ
बैठक के बाद किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि मंगलवार को उनका संगठन हिसार एग्रीकल्चर विश्वविद्यालय में छात्रों के धरने में शामिल होगा। उनका संगठन छात्रों के साथ हैं। विश्वविद्यालय में धरने पर जो छात्र हैं। वह हमारे ही बच्चे हैं। उनको हमारा पूरा समर्थन है। लड़ाई जो भी वो लड़ रहे हैं वह अपने तरीके से लड़ रहे हैं। लड़ाई उनके हाथ में हैं। उनको जरूरत है तो वह उनके साथ हैं। वहां धरना नहीं लगाया जाएगा। छात्र अपना फैसला लेने के लिए आजाद हैं। अगर उनको किसान यूनियन की जरूरत होगी तो उनका साथ देंगे।
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सरकार किसानों को आपस में लड़ाने का ड्रामा रच रही
पंजाब हरियाणा के पानी मामले को लेकर उन्होंने कहा कि इस मामले में हमारी किसान यूनियन का स्टैंड मजबूत है। पानी हर किसान की जीवन रेखा है और उसकी जरूरत है। सरकार किसानों को आपस में लड़ाने का ड्रामा रच रही है। सरकार को चाहिए कि वो किसानों को पानी देने पर काम करे। उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन को कैसे मजबूत बनाया जाए, एसकेएम ओर नॉन एसकेएम दोनों मिलकर इस पर हम काम कर रहे हैं। पूरे देश को एकजुट करने का प्रयास कर रहे हैं। आज उन्होंने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है कि आज वह एसकेएम का हिस्सा तो हैं, उसके साथ-साथ भारतीय किसान यूनियन एकता सिद्धपुर का स्थाई पार्ट बन कर चलने का प्रयास कर रहे हैं। किसानों के मुद्दे को लेकर अलग-अलग लड़ने की जगह सब मिलकर लड़ें तो लड़ाई मजबूत होगी।

यूनिवर्सिटी के छात्रों को इंसाफ नहीं दे पाए, किसानों का क्या करेंगे समाधान
खनोरी बॉडर पर जब किसान आंदोलन चल रहा था तब सुप्रीम कोर्ट ने एक कमेटी गठित की थी। इसमें हिसार एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के भी प्राेफेसर को भी शामिल किया गया था। जो अपने यूनिवर्सिटी के छात्रों को इंसाफ नहीं दे पाए, वह किसानों का क्या समाधान करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह किसी राजनीतिक पार्टी का समर्थन नहीं करेंगे और न ही इलेक्शन लड़ेंगे। वह जो लड़ाई किसान के लिए लड़ रहे हैं वह किसी पर अहसान नहीं जता रहे हैं। शहीदों ने देश के लिए पता नहीं क्या-क्या झेला है। देश की आजादी की जब लड़ाई चली थी तब हरियाणा और पंजाब एक था। उसमें 92 प्रतिशत कुर्बानियां पंजाब और हरियाणा से हुई।
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