धर्मवीर निडाना
जींद। दिल्ली की जिला अदालत की परीक्षा का पेपर हल करने की सूचना पर पुलिस की ओर से मार गए छापे में तीन युवकों को दबोचा है। रविवार सुबह पुलिस, सीआईए की टीम ने काकड़ौद गांव के पास मुर्गी फार्म में बने मकान में छापा मारा था। हालांकि अभी मामले में किस स्तर तक सेटिंग थी, इसकी जानकारी पुलिस जुटा रही है। प्रश्न पत्र हल करने की एवज में उम्मीदवारों से पांच से सात लाख रुपये लिए जाते हैं। फर्जीवाड़ा करने वाला सबसे अधिक राशि सॉल्वर पर खर्च करता है। इसके लिए पांच से छह सॉल्वर जुटाए जाते हैं।
पिछले चार-पांच साल से देश में बड़ी परीक्षाओं के प्रश्न पत्र लीक होने में जींद जिले के लोगों के नाम सामने आते रहे हैं।
अब रविवार को नया मामला आया है। प्रश्न पत्र की आंसर-की उम्मीदवार को परीक्षा समाप्त होने से कुछ समय पहले दी जाती है। महज दस मिनट में ही यह पूरा खेल कर दिया जाता है। इसके बाद आंसर-की उम्मीदवारों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी दूसरे लोगों की होती है। फिलहाल पकड़े गए सभी आरोपियों को जींद सीआईए थाने में लाया गया है। पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है। वहीं मामले की जांच के लिए पुलिस अब साइबर सैल की भी मदद ले रही है। इससे यह जानकारी जुटाई जा रही है। ठिकाने पर कितने मोबाइल फोन सक्रिय थे, इन लोगों तक आसानी से पहुंचा जा सकेगा।
ईमानदारी से चलता है बेईमानी का धंधा
रुपये लेकर प्रश्न पत्र हल करने का यह बेईमानी का धंधा बहुत ईमानदारी के साथ होता है। जांच कर रहे एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि सेटिंग करने वाला सबसे पहले प्रश्न पत्र लीक कराने के लिए मोटी रकम खर्च करता है। इसके लिए वह अपने ग्राहकों (उम्मीदवारों) की संख्या के आधार पर रुपये लगाए जाते हैं। परीक्षा की तारीख तय होते ही उम्मीदवार संपर्क में आने शुरू हो जाते हैं। इन लोगों को नेटवर्क काफी बड़ा है।
हर विषय का एक्सपर्ट होता है सॉल्वर
प्रश्न पत्र हल कराने वाले गिरोह की सारी जिम्मेदारी सॉल्वर पर होती है। पांच-छह ऐसे लोगों को हायर किया जाता है, जो 10-15 मिनट में ही प्रश्न पत्र को हल कर दें। इसके लिए गूगल से लेकर पुस्तकों की भी मदद ली जाती है। इन विशेषज्ञों के 90 प्रतिशत तक उत्तर सही होते हैं। इसके बाद कोड के अनुसार आंसर की तैयार कर भेज दी जाती है।
करीब 50 लोग थे मौके पर
मुखबिर ने उचाना पुलिस के दो कर्मचारियों से व्यक्तिगत तौर पर मिलकर पूरे मामले की सूचना दी थी। इसके बाद जब पुलिस पहुंची तो यहां प्रदेश के विभिन्न जिलों के पंजीकरण नंबर की बाइक व कार मौजूद थी। पुलिस को दूर से आते देख कर काफी लोग मौके से भाग निकले। सूत्रों के अनुसार सात-आठ युवकों को पुलिस ने पकड़ा है, जबकि पुलिस आधिकारिक रूप से तीन लोगों की ही पुष्टि कर रही है। गिरफ्तार आरोपियों में से एक व्यक्ति काराधान विभाग में कार्यरत है। हालांकि इसकी संलिप्ता इस मामले में है या नहीं, इसकी जानकारी पुलिस जुटा रही है।
आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। अभी तक कोई ऐसी जानकारी नहीं मिली है, जिससे किसी गिरोह या अन्य व्यक्ति का खुलासा हो सके। आरोपियों के पास से मिले लैपटॉप, फोन व अन्य उपकरणों की जांच की जा रही है। इसके बाद ही स्थिति साफ होगी।
- जितेंद्र कुमार, डीएसपी उचाना