02 जेएनडी26: मालवी गांव में फार्मर आईडी बनाते कर्मचारी। स्रोत: प्रशासन
जुलाना। केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ किसानों तक पारदर्शी तरीके से पहुंचाने के उद्देश्य से फार्मर आईडी अनिवार्य की जा रही है लेकिन जुलाना खंड के किसान खास रुचि नहीं ले रहे हैं। स्थिति यह है कि अब तक खंड के 10 प्रतिशत किसानों ने भी फार्मर आईडी नहीं बनवाई है।
कृषि विभाग के अनुसार, फार्मर आईडी नहीं बनने की स्थिति में भविष्य में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि सहित अन्य कृषि योजनाओं का लाभ मिलने में दिक्कत आ सकती है। जुलाना खंड में करीब 70 हजार किसान पंजीकृत हैं लेकिन इनमें से अब तक केवल लगभग साढ़े छह हजार किसानों की ही फार्मर आईडी बन पाई है। यह आंकड़ा कुल किसानों की संख्या के मुकाबले काफी कम है।
विभाग की ओर से लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं और गांव-गांव जाकर कैंप भी लगाए जा रहे हैं। इसके बावजूद किसानों की भागीदारी संतोषजनक नहीं है।
खंड कृषि अधिकारी डॉ. सुरजमल का कहना है कि सभी गांवों में कैंप लगाने के बाद भी किसान वहां पहुंच नहीं रहे। किसानों में फार्मर आईडी को लेकर कई तरह की भ्रांतियां फैली हुई हैं। डर यह है कि फार्मर आईडी बनवाने के बाद उनकी बुढ़ापा पेंशन या राशन कार्ड कट सकता है। इसी आशंका के चलते कई किसान आईडी बनवाने से कतरा रहे हैं। फार्मर आईडी बनवाने से किसी भी किसान की सामाजिक सुरक्षा योजनाएं जैसे वृद्धावस्था पेंशन या राशन कार्ड प्रभावित नहीं होंगे।
खंड कृषि अधिकारी ने कहा कि फार्मर आईडी का उद्देश्य केवल किसानों का सही और अद्यतन डाटा तैयार करना है ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक किसानों तक पहुंच सके और फर्जीवाड़े पर रोक लगाई जा सके। सभी किसान समय रहते अपनी फार्मर आईडी बनवा लें। आने वाले समय में कई योजनाओं को फार्मर आईडी से जोड़ा जा सकता है ऐसे में जिन किसानों की आईडी नहीं होगी वे लाभ से वंचित रह सकते हैं। यदि समय रहते किसानों ने फार्मर आईडी नहीं बनवाई तो उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में परेशानी उठानी पड़ सकती है।