जींद। स्वास्थ्य विभाग ने एक सप्ताह तक चलने वाले अपने एनीमिया मुक्त अभियान का सोमवार से शुभारंभ किया। इसमें स्कूल हेल्थ की 12 टीमों ने आंगनबाड़ी केंद्रों में जाकर बच्चों के रक्त की जांच की। इसमें जिन बच्चों में खून की कमी पाई गई, उनको दवाइयां दी गई। इसके अलावा उनको खान-पान के प्रति भी जागरूक किया गया।
स्कूल हेल्थ के डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. रमेश पांचाल ने बताया कि एनीमिया सप्ताह के तहत स्कूलों में सभी बच्चों, आंगनबाड़ी केंद्रों में तथा गर्भवति महिलाओं में खून की कमी को दूर करने के लिए अभियान चलाया गया। स्वास्थ्य विभाग की टीमें अलग-अलग केंद्रों में गई और सोमवार को 500 बच्चों तथा 100 के आसपास गर्भवति महिलाओं के रक्त की जांच की गई। इसमें खासकर गर्भवति महिलाओं में रक्त की कमी पाई गई। उनको आयरन, फोलिक एसिड की गोलियां दी गई। इसके अलावा महिलाओं को खानपान के बारे में भी जागरूक किया गया ताकि भविष्य में उनमें रक्त की कमी नहीं रहे। डॉ. पांचाल ने बताया कि खाने में सभी को दूध, लस्सी, घी, गुड़-चना, सलाद तथा हरी सब्जियों का प्रयोग करना चाहिए। फास्ड फूड से बचना चाहिए। इसके अलावा वर्ष में दो बार मुफ्त में रक्त की जांच की जाती, जो हर किसी को करवानी चाहिए। यदि रक्त की कमी हो तो तुरंत दवाइयां तथा अपने खान-पान के तरीके को बदलना चाहिए।
झुग्गी-झोपड़ियों व ईंट-भट्ठों पर भी चलेगा अभियान
डॉ. रमेश पांचाल ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीमें खासकर बच्चों व गर्भवति महिलाओं में रक्त की कमी को लेकर अभियान चला रही है। यदि चिकित्सकों द्वारा बताए गए खान-पान का ध्यान रखा जाए तो किसी भी गर्भवति महिला व बच्चों में खून की कमी नहीं रहेगी। स्वास्थ्य विभाग द्वारा निशुल्क रक्त जांच की जाती है। सभी को इसका लाभ उठाना चाहिए। कॉलेज में पढ़ने वाली लड़कियों की जांच भी की जा रही है।