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Jind News: जिलेभर में धूमधाम से मनाई गई गुरु रविदास की जयंती

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जींद। गुरु रविदास का जन्मोत्सव शनिवार को जिलेभर में धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान जगह-जगह भंडारे का आयोजन किया गया। इस दौरान रविदास महासभा द्वारा रामराये गेट पर हवन यज्ञ का आयोजन किया गया। इसमें विधायक कृष्ण मिड्ढा बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। इसके अलावा जिला परिषद चेयरमैन (प्रतिनिधि) कुलदीप पिंडारा ने अति वशिष्ठ अतिथि शामिल हुए। इसके बाद शाम को शोभायात्रा निकाली गई। विधायक कृष्ण मिड्ढा ने कहा कि संत किसी जाति के नहीं, बल्कि पूरे समाज का भला करने के लिए धरा पर आते हैं। सभी लोगों को संतों के दिखाए गए मार्ग पर चलना चाहिए। सभा के प्रधान सूबेसिंह व प्रवक्ता राजिंद्र पातलान ने बताया कि सुबह के समय मंदिर प्रांगण में हवन का आयोजन किया गया। इसमें विधायक डॉ. कृष्ण मिड्ढा ने मुख्यातिथि के तौर पर शिरकत की। इसके बाद लंगर का आयोजन किया गया। दोपहर बाद बाहर से आए कलाकारों ने झांकियां प्रस्तुत कीं। शाम को शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा गुरु रविदास मंदिर रामराये गेट से शुरू होकर झांझ गेट, रुपया चौक से होती हुई गुरु रविदास मंदिर पर वापस लौटी।
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विचारों को आत्मसात करना चाहिए
संत शिरोमणि गुरु रविदास महाराज की जयंती पर एससी समाज एकता मंच द्वारा रानी तालाब आंबेडकर चौक पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जयंती उत्सव में रघुबीर भारद्वाज, श्रीचंद जैन, राजबीर कटारिया, महाबीर कंप्यूटर, सारंग शमशेर ढाठरथ, जयप्रकाश रेढू आदि ने भाग लिया। महाबीर कंप्यूटर ने कहा कि गुरु रविदास की जयंती पर सभी को उनके विचारों को आत्मसात करना चाहिए। एससी समाज एकता मंच के रोशन लाल दुग्गल, कमल चौहान, धर्मपाल सिंहमार ने कहा कि धरना कमेटी द्वारा सभी समाजों के महान पुरुषों, संतों की जयंती मनाई जाती है। इससे सभी समाजों के लोगों में आपसी भाईचारा को बढ़ावा मिलता है।

संत रविदास की जयंती पर सेमिनार आयोजित
अहिका गांव में संत रविदास की जयंती पर आंबेडकर भवन में सेमिनार का आयोजन किया। मजदूर नेता और डॉ. बीआर आंबेडकर कल्याण समिति के प्रधान कपूर सिंह ने संबोधित किया। बताया कि दुनिया-भर में समता, समानता, बराबरी और भाईचारे की अलख जगाने वाले संत रविदास की जयंती का इस बार खास महत्व है। ज्ञान-विज्ञान समिति कबीर से लेकर महर्षि वाल्मीकि, बाबा शेख फ़रीद, नानक, दरिया, नामदेव, धन्ना, अमीर खुसरो, रज्जब, पलटू, रैदास, जनाबाई, मीरा, दादू दयाल, सावित्रीबाई फुले और ज्योतिबा फुले जैसे समाज सुधारकों की विरासत को मेहनतकश जनता के बीच ले जाना चाहती है।
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