जींद। अब एडीसी कार्यालय भी लघु सचिवालय में ही शिफ्ट हो गया है। डीसी जिस कमरे में पहले बैठते थे, अब वहां पर एडीसी बैठेंगे। डीसी ने अपना नया कक्ष बना लिया है। एडीसी कार्यालय को लघु सचिवालय में शिफ्ट करने का मकसद लोगों को एक ही छत के नीचे सभी अधिकारी उपलब्ध कराना है। पहले एडीसी कार्यालय डीआरडीए में था, जो डीसी कार्यालय से लगभग एक किलोमीटर दूर है। अब एक ही स्थान पर लोगों को अपनी समस्याएं रखने के लिए डीसी तथा एडीसी उपलब्ध होंगे।
डीसी मोहम्मद इमरान रजा ने कार्यभार संभालने के बाद यह महसूस किया कि अहम प्रशासनिक अधिकारियों के एक छत के नीचे नहीं बैठने से लोगों को दिक्कत हो रही है। सबसे बड़ी दिक्कत डीसी और एडीसी कार्यालय के बीच की लगभग एक किलोमीटर की दूरी उन्हें नजर आई। डीसी कार्यालय लघु सचिवालय परिसर में है, तो एडीसी कार्यालय लगभग एक किलोमीटर दूर पुराने बस स्टैंड के पास डीआरडीए परिसर में है। इससे जब किसी को अपने काम के लिए एडीसी कार्यालय से डीसी कार्यालय या डीसी कार्यालय से एडीसी कार्यालय भेजा जाता है, तो लोगों को खासी दिक्कत होती है। उन्हें ऑटो का किराया चुकाना पड़ता है या पैदल जाना पड़ता।
सबसे ज्यादा दिक्कत महिलाओं और बुजुर्गों को होती है। इस दिक्कत को देखते हुए डीसी मोहम्मद इमरान रजा ने लघु सचिवालय परिसर में अधिकारियों के बैठने के कक्षों और पूरी व्यवस्था की समीक्षा की। समीक्षा के बाद उन्होंने तय किया कि एडीसी अब डीआरडीए की बजाय लघु सचिवालय परिसर में बैठेंगे। खुद डीसी ने लघु सचिवालय परिसर के अपने दफ्तर को पहली मंजिल पर ही दूसरी जगह शिफ्ट कर लिया है। इससे यहां एडीसी के दफ्तर के लिए जगह बनाई गई है। जहां पहले डीसी बैठते थे, वहां एडीसी बैठेंगे।
कई दशक पुरानी व्यवस्था एक झटके में बदली
डीसी मोहम्मद इमरान रजा ने जींद में एडीसी दफ्तर की कई दशक पुरानी व्यवस्था को एक झटके में बदल दिया है। 1989 से भी पहले से जींद का एडीसी दफ्तर डीआरडीए परिसर में चलता आ रहा था। कभी भी इसे लघु सचिवालय परिसर में डीसी दफ्तर के साथ शिफ्ट करने पर विचार नहीं हुआ। डीसी मोहम्मद इमरान रजा ने दशकों पुरानी इस व्यवस्था को एक झटके में बदलते हुए एडीसी दफ्तर को लघु सचिवालय परिसर में शिफ्ट कर दिया है।