किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी मंगलवार को उझाना गांव पहुंचकर धूणों के बीच बैठकर तप कर रहे किसान रामभज का हौसला बढ़ाया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार का घमंड ज्यादा दिन नहीं टिक सकता है।
उन्होंने कहा कि आखिर भाजपा सरकार किसानों की कितनी तपस्या देखना चाहेगी। उन्होंने किसान रामभज की तपस्या को सलाम किया और कहा कि कृषि कानूनों के विरोध में जेठ की धूप में सात धूणों के बीच बैठकर तप करना कोई आसान कार्य नहीं है। किसान रामभज की तपस्या को व्यर्थ नहीं जाने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि धन्य है ऐसी मां जिसने रामभज जैसे सपूत को जन्म दिया है। रामभज पूरे गांव का नाम रोशन कर रहे हैं। चढूनी ने कहा कि हम प्रधानमंत्री के आगे तपस्या कर रहे हैं और किसान रामभज परमात्मा के सामने। उन्होंने कहा कि जब राजाहठ पकड़ लेता है तो राज और परिवार दोनों तबाह हो जाते हैं। राजा की हठ की बदौलत 400 से ज्यादा किसान आंदोलन के दौरान मौत का ग्रास बन चुके हैं। निर्दयी सरकार किसानों की कुर्बानी से भी नहीं मानी तो उनको लड़ना पड़ रहा है।
गौरतलब है कि उझाना गांव में किसान रामभज की तपस्या के बारे में ज्यों ही गुरनाम सिंह चढूनी को पता लगा तो वे तुरंत हौसला बढ़ाने के लिए उझाना गांव पहुंच गए। हालांकि तीन जून को उझाना के ग्रामीणों द्वारा किसान नेता राकेश टिकैत व गुरनाम सिंह चढूनी का कार्यक्रम तय किया गया है। लेकिन किसान रामभज का हौसला बढ़ाने के लिए गुरनाम सिंह पहले ही पहुंच गए। चढूनी बद्दोवाल टोल पर किसान धरने पर भी पहुंचे और किसानों का अनशन समाप्त करवाया। इस अवसर पर सुनील बद्दोवाल, मास्टर बलवीर सिंह, चांद बहादूर , पिरथी सिंह, महेंद्र सिंह, धर्मपाल, शीशपाल, डिंपल भी मौजूद रहे।
कृषि कानूनों को रद्द करे केंद्र सरकार : चढूनी
खटकड़ टोल पर चल रहे धरने पर किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी पहुंचे। धरनास्थल पर किसान विनोद शर्मा के बेटे शिवम शर्मा का जन्मदिन मनाया गया। चढूनी ने कहा कि जब तक तीनों कृषि कानून रद्द नहीं होते, किसानों का धरना जारी रहेगा। किसान दिल्ली बॉर्डर पर धरना दे रहे हैं तो प्रदेश में भी किसान टोलों के पास धरनों पर बैठे हैं। किसान आंदोलन अब जन आंदोलन बन चुका है। केंद्र सरकार को चाहिए कि वह राजहठ को छोड़कर किसानों की मांग मानते हुए कृषि कानूनों को रद्द करे और एमएसपी पर कानून बनाए। चढूनी ने कहा कि भाजपा व जजपा के नेता अपने कार्यक्रम आयोजित करके जवान व किसान को लड़वाना चाहते हैं। खाप, पंचायतें व किसान संगठन फैसला कर चुके हैं कि जब तक किसान आंदोलन चलेगा तब तक भाजपा व जजपा नेताओं के कार्यक्रमों का विरोध किया जाएगा। पांच जून को भाजपा व जजपा के विधायकों व सांसदों के निवास के बाहर कृषि कानूनों की प्रतियां फूंककर विरोध जताएंगे। इस मौके पर आजाद पालवां, सतबीर पहलवान, बिजेंद्र सिंधु व रामनिवास मौजूद रहे।