जींद। हरियाणा स्कूल लेक्चरर एसोसिएशन (हसला) के जिला प्रधान जोगेंद्र लोहान ने कहा कि प्रदेश सरकार कर्मचारियों की पुरानी पेंशन की मांग की तरफ ध्यान नहीं दे रही है। इसके कारण प्राध्यापक वर्ग में रोष है। अगर सरकार ने समय रहते मांगों को पूरा नहीं किया तो इसका खामियाजा सरकार को भुगताना पड़ेगा।
उन्होंने बताया कि सातवें वेतन आयोग के अनुसार मकान किराया भत्ता महंगाई भत्ते की दर 25 प्रतिशत होने पर नौ प्रतिशत और 50 प्रतिशत होने पर 10 प्रतिशत किया जाना था। लेकिन सरकार ने अभी तक इस मामले पर कोई संज्ञान नहीं लिया गया है। आठ प्रतिशत की दर से ही मकान किराया भत्ता कर्मियों को दिया जा रहा है। जिसके कारण कर्मियों को हर महीने हजारों रुपयों का नुकसान हो रहा है। इसी प्रकार कर्मियों के आश्रितों को मिलने वाली चिकित्सा सुविधा भी विवाद का विषय बनी हुई है। क्योंकि पिछले लगभग 20 वर्षों से आश्रितों की आमदनी बारे कोई बदलाव नहीं किया गया है। आज के समय में आश्रितों की 42 हजार रुपये की सालाना आमदनी की शर्ते लगाना अव्यवहारिक है। उन्होंने बताया कि ब्लॉक वर्ष 2020-2023 की एलटीसी ब्लॉक वर्ष समाप्त हो जाने के बाद भी आधे से ज्यादा कर्मियों को नही मिल पाई है। पदनाम, वेतन एवं एसीपी निर्धारण संबंधी विसंगतियों को दूर करना,वरिष्ठता सूची जारी करना, शिशु देखभाल छुट्टी के लिए ऑनलाइन पोर्टल चालू करना आदि प्राध्यापक वर्ग की मांगे वर्षों से लटकी हुई हैं। सरकार बार-बार वायदा कर के मांगों को वर्षों से लटका रही है। उन्होंने संगठन मांग करता है कि सरकार जल्द से जल्द कर्मचारियों की मांगों को पूरा करने का काम करें।