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मरीजों की बजाय ‘अपनी’ सवारी बनी सरकारी एंबुलेंस

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इसी एंबुलेंस के चालक ने बरती लापरवाही। संवाद - फोटो : Jind
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जींद। नागरिक अस्पताल में मरीजों की सुविधा के लिए रखी सरकारी एंबुलेंस का इस्तेमाल मरीजों के लिए न होकर निजी कामों के लिए हो रहा है। 17 जनवरी को जींद नागरिक अस्पताल में आए गंभीर मरीज को रोहतक पीजीआई रेफर किया गया। इस दौरान एंबुलेंस से मरीज को रोहतक करीब 62 किलोमीटर छोड़ने गई। आमतौर पर एंबुलेंस को आने-जाने में करीब 3 घंटे लगते हैं। लेकिन यह एंबुलेंस करीब 12 घंटे बाद अस्पताल लौटी। एंबुलेंस चालक रोहतक से सीधा जींद आने की बजाय वाया गोहाना होकर जींद पहुंचा। इस दौरान एंबुलेंस ने करीब 142 किलोमीटर का सफर तय किया, यानि करीब 80 किलोमीटर अतिरिक्त एंबुलेंस बिना मरीज के चली। सूचना मिलने पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने एंबुलेंस में सवार चालक, ईएमटी और ऑपरेटर के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए सिविल सर्जन डॉ. मनजीत सिंह को पत्र लिखा है।
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जानकारी के अनुसार 17 जनवरी को एंबुलेंस नंबर एचआर-56बी-2300 जींद से रेफर किए एक मरीज को रोहतक पीजीआई में छोड़ने के लिए गई। यह एंबुलेंस 12 घंटे बाद जींद लौटी। रेफरल ट्रांसपोर्ट के डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. राजेश भोला को पता चला तो उन्होंने एंबुलेंस की लोकेशन और रूट के बारे में जीपीएस सिस्टम से पता किया। इसमें सामने आया कि एंबुलेंस चालक रोहतक से वाया गोहाना होकर जींद लौटा है। इसमें एंबुलेंस चालक, एंबुलेंस में तैनात ईएमटी और कंट्रोल रूम में काम करने वाले ऑपरेटर की मिलीभगत है। डॉ. राजेश भोला ने तीनों से स्पष्टीकरण मांगा लेकिन वह कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए।
एंबुलेंस चालक स्वास्थ्य विभाग को लगा रहे चूना
एंबुलेंस चालकों की निजी अस्पतालों से मिलीभगत के कारण स्वास्थ्य विभाग को मोटा चूना लग रहा है। जींद से सीधी एंबुलेंस पीजीआई रोहतक में जाकर वापस जींद लगभग तीन घंटे में वापस आ जाती है। रोहतक से वाया गोहाना आने का कोई रूट नहीं है, फिर भी एंबुलेंस चालक गोहाना होकर जींद पहुंचा। चालक ने अपने स्पष्टीकरण में कहा कि एंबुलेंस खराब हो गई थी लेकिन ऐसा नहीं था। इससे स्पष्ट है कि एंबुलेंस चालक किसी मरीज को रोहतक से लेकर गोहाना पहुंचा था। पूरे मामले की जांच की जाए और एंबुलेंस चालकों पर नजर रखी जाए तो काफी कुछ सामने आ सकता है।
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फिलहाल चालक, ईएमटी और ऑपरेटर की जांच चल रही है। उन्हें जांच रिपोर्ट नहीं मिली। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद मामले में उचित कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. मनजीत सिंह, सिविल सर्जन।
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