प्रदेश सरकार द्वारा नगर परिषद के अधीन आने वाले क्षेत्र में लीज धारकों व किरायेदारों को मालिकाना हक देने की अच्छी पहल है। इससे जिलेभर में पांच सौ से ज्यादा लीज व किराये पर रहने वाले दुकानदारों व परिवारों को लाभ मिलेगा। अकेले जींद शहर में ही करीब 300 किरायेदारों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।
नगर परिषद द्वारा 329 दुकानें लीज पर दी गई हैं, जिससे नगर परिषद को प्रति माह छह लाख रुपये की आमदनी होती है। ये दुकानें सफीदों गेट, पुराना बस स्टैंड, गोहाना रोड, नया बस स्टैंड व काठ मंडी के पास व रोहतक रोड पर है। करीब 300 दुकानें ऐसी हैं, जिन्हें पिछले 30 साल से एक ही दुकानदार द्वारा लीज पर लिया हुआ है।
वहीं नरवाना, जुलाना, सफीदों व उचाना में भी नगर परिषद की दुकानों पर किराये पर बैठे दुकानदारों को अपनी दुकान की उम्मीद बंधी है। सफीदों में नगर पालिका द्वारा 226 दुकानें किराये पर दी गई हैं, जिनमें से चार दुकानें ऐसी हैं, जो लीज धारकों द्वारा 30 साल से ली हुई हैं।
वहीं जुलाना में 20 दुकानें और 50 प्लाट हैं, जो नगर परिषद द्वारा लोगों को लीज पर दिए हुए हैं। खाली प्लाटों पर लोगों ने स्वयं मकान बनाए हुए हैं।
क्षेत्र के हिसाब से हो रेट तय, बीपीएल परिवारों को मिले अलग से छूट
उचाना। लीज पर दुकान, मकान बना कर रह रह रहे लोगों का कहना है कि वर्षों पहले नगर पालिका ने लीज के प्लाट अलॉट किए हुए हैं। हर साल नगर पालिका हाउस टैक्स की तरह किराया भी लेती है, लेकिन उनको मालिकाना हक नहीं मिल रहा था।
अब सरकार द्वारा लीज के प्लॉट धारकों को मालिकाना हक देने का फैसला सराहनीय है। लीज धारकों व किरायेदारों ने सरकार से कामर्शियल रेट की बजाय कैटेगरी तय करके जो प्लॉट अलॉट किए गए हैं, वहां रहे हैं लोगों की कैटेगरी तय करे।
जो लोग बीपीएल परिवार से है लीज के प्लॉट पर मकान, दुकान बना कर रह रहे हैं, वो कामर्शियल रेट भर कर मालिकाना हक नहीं ले सकते हैं। नगर पालिका के अधीन आने वाले एरिया में 55 दुकानें, 437 प्लॉट हैं, जो लीज पर है।
संजय मित्तल ने कहा कि सरकार की पहल अच्छी है, लेकिन इससे हमें मालिकाना हक मिलेगा। सरकार को भी इससे आय होगी, जो लोग दुकान, मकान में रहते हैं, वो रजिस्ट्री करा कर लोन ले सकेंगे। सरकार को चाहिए कि वो क्षेत्र के हिसाब से रेट तय करे।
जिला हर मामले में पिछड़ा हुआ है। यहां जो रेट हो, वो एरिया के हिसाब से होने चाहिए न कि अर्बन एरिया के हिसाब से हो। बारूराम ने कहा कि मालिकाना हक देने के लिए नगर पालिका को चाहिए कि वो कैटेगरी निर्धारित करें।
जो लोग बीपीएल परिवारों से हैं, उनके लिए लीज की जगह नाम करवाने के लिए रियायतें होनी चाहिए। इस तरह की योजना कांग्रेस सरकार में बनी थी जो सफल नहीं हो पाई। जो रेट तय किए गए थे, वो काफी ज्यादा थे।
सरकार की अच्छी पहल
लीज धारकों को मालिकाना हक देने की अच्छी पहल है। मालिकाना हक मिलने से अपनी सहूलियत के अनुसार दुकान को बना सकेंगे। मालिकाना हक देने की पहल तो की है, लेकिन अभी तक तय नहीं है कि कलेक्टर रेट पर मालिकाना हक दिया जाएगा या मार्केट वैल्यू के अनुसार।
राजेश, लीज धारक
दुकानदारों के आएंगे अच्छे दिन
दुकान पर मालिकाना हक मिलने के बाद बैंक से मिलने वाली ऋण सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे। इससे दुकानदारों के अच्छे दिन आएंगे। कलेक्टर रेट की बजाय वहां की मार्केट वैल्यू के अनुसार ही मालिकाना हक देना चाहिए। कलेक्टर रेट व मार्केट वैल्यू में काफी असमानता होने की वजह से असमंजस की स्थिति है।
ललित, लीज धारक
समाचार पत्रों से ही इस बारे में जानकारी मिली है। सरकार की तरफ से जो भी दिशा-निर्देश मिलते हैं, उसके अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
हरदीप सिंह, कार्यकारी अधिकारी
नगर परिषद, जींद।