14जेएनडी24: नागरिक अस्पताल में मरीजों को काला मोतिया के बारे में जागरूक करते हुए डॉ. गितांशु। स
- फोटो : samvad
जींद। काला मोतिया यानी ग्लूकोमा आंखों की ऐसी गंभीर बीमारी है जो धीरे-धीरे दृष्टि को नुकसान पहुंचाती है। समय पर इलाज न मिलने पर अंधता का कारण बन सकता है। यह बीमारी अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के बढ़ती है। इसलिए इसे ‘दृष्टि का खामोश चोर’ भी कहा जाता है। इसको लेकर जिला मुख्यालय स्थित नागरिक अस्पताल में काला मोतिया सप्ताह के तहत शनिवार को जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। आई सर्जन डाॅ. गितांशु ने कहा कि 40 वर्ष की आयु के बाद नियमित नेत्र की जांच कराना जरूरी है।
डिप्टी एमएस डा. राजेश भोला ने बताया कि ऑप्टिक तंत्रिका की जांच और आंखों के अंदर दबाव का मापन इस बीमारी की शुरुआती पहचान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। समय पर निदान और उपचार से रोग की गति को धीमा किया जा सकता है और आंखों की रोशनी को सुरक्षित रखा जा सकता है।
ग्लूकोमा में आंख के अंदर दबाव बढ़ने से ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचता है, जो आंखों से मस्तिष्क तक दृश्य संकेत पहुंचाने का काम करती है। यह अंधेपन का दूसरा बड़ा कारण माना जाता है। शुरुआत में इसके लक्षण दिखाई नहीं देते लेकिन बाद में दृष्टि धुंधली होना, आंखों में तेज दर्द, सिरदर्द, मतली और रोशनी के चारों ओर इंद्रधनुषी घेरे दिखाई देना इसके संकेत हो सकते हैं।
वर्जन
आंखों की सुरक्षा के लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं। नियमित व्यायाम करें, संतुलित आहार लें और धूम्रपान से परहेज करें। बीमारी का जितनी जल्दी पता चलता है, उतनी ही आसानी से दवाओं, लेजर या सर्जरी के माध्यम से नियंत्रित किया जा सकता है। - डा. गितांशु आई सर्जन नागरिक अस्पताल जींद।