जींद। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की नई पेयजल प्रबंधन एवं रखरखाव नीति को लेकर पिल्लूखेड़ा और उचाना में सरपंचों व ग्राम सचिवों के लिए प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए गए। शिविर में अधिकारियों ने ग्राम पंचायतों से विशेष ग्राम सभाएं बुलाकर नई नीति को पारित करवाने और ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया।
पिल्लूखेड़ा बीडीपीओ हाल में आयोजित प्रशिक्षण शिविर में बीडीपीओ प्रवीन कुमार ने कहा कि पेयजल व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए ग्राम पंचायतों की सक्रिय भूमिका जरूरी है। नई नीति को होने वाली विशेष ग्राम सभाओं में रखा जाए और ग्रामीणों की सहमति से इसे पारित करवाया जाए।
जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग और जल एवं स्वच्छता सहायक संगठन के जिला सलाहकार रणधीर मताना ने बताया कि नई नीति के तहत ग्राम पंचायत, ग्राम जल एवं सीवरेज समिति और विभाग के बीच साझा घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। इसके बाद गांवों में पेयजल व्यवस्था के रखरखाव का कार्य पंचायतों की भागीदारी से किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि नीति के तहत गांवों के लिए तैयार किए गए एस्टीमेट का चौथा हिस्सा अग्रिम राशि के रूप में ग्राम पंचायत को दिया जाएगा। इस राशि से पाइपलाइन लीकेज, मोटर मरम्मत, अस्वच्छ कनेक्शन और बिजली से संबंधित कार्य करवाए जा सकेंगे।
पंचायतों को इंडियन बैंक में अलग खाता खुलवाना होगा, जिसमें पेयजल बिल की राशि जमा होगी। विभाग भी गांव में जमा राशि के बराबर सहयोग राशि देगा।
इस अवसर कनिष्ठ अभियंता गोविंद गोयल, विनय कुमार, सुनील कुमार और खंड समन्वयक कुशल शर्मा ने नई नीति की जानकारी दी। कार्यक्रम में सरपंचों और ग्राम सचिवों ने भी पेयजल समस्याओं से जुड़े सुझाव साझा किए।
विभाग हर घर तक स्वच्छ पानी पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध
उपमंडल अभियंता राकेश शर्मा ने कहा कि विभाग हर घर तक साफ और स्वच्छ पानी पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। गांवों की जरूरत के अनुसार एस्टीमेट तैयार कर मुख्यालय भेजे गए हैं। उन्होंने जल संरक्षण को समय की जरूरत बताते हुए पंचायतों से सहयोग की अपील की।