जींद। शहर और गांव के लिंक मार्गों पर बेसहारा गोवंश ने डेरा डाल लिया है। गोवंश सूरज ढलते ही मक्खी और मच्छरों से बचने के लिए सड़कों पर आ जाते हैं। शहर में एसपी निवास, लघु सचिवालय के बाहर, राजकीय कॉलेज, रानी तालाब, देवीलाल चौक, रोहतक रोड, पटियाला चौक, सैनी रामलीला ग्राउंड के पास इनका कब्जा है। इससे वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। साथ ही हादसे का भी भय बना रहता है। इसके बाद भी इस ओर किसी का ध्यान नहीं है।
जिले में 25 से ज्यादा गोशाला हैं। उनमें से अधिकतर गोशालाएं केवल दिखावे के लिए हैं। इनमें नामात्र गोवंश मौजूद मिलेंगे। मौजूदा समय में सड़कों पर 1800 से भी ज्यादा गोवंश घूम रहे हैं, जो हादसों का कारण बन रहे हैं। शहर के हर वार्ड में कम से कम 30 से 40 गायें हैं, जो दिन भर इधर-उधर विचरण करती रहती हैं। सड़क पर बैठे गोवंश को बचाने के प्रयास में दुर्घटना हो रही है। यह समस्या गंभीर रूप ले चुकी है।
घूम रहा नंदीशाला का टैग लगा गोवंश
शहर की सड़कों पर टैग लगे कई गोवंश घूमते नजर आते हैं। जब ठेकेदार ने गोवंश को नंदीशाला में छोड़ा था तो उन पर टैग लगाया था और पेंट से निशान भी बनाए गए, ताकि उन्हीं पशुओं को बार-बार नंदीशाला में छोड़ने के पैसे नहीं देने पड़े, लेकिन अब ये गोवंश नंदीशाला से बाहर घूम रहे हैं। यह सब नंदीशाला संचालकों की लापरवाही से हो रहा है, क्योंकि नंदीशाला के कर्मचारी जान बूझकर गोवंश को खुले में छोड़ देते हैं, जो दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं।
गोवंश से कई लोग गंवा चुके हैं जान
वर्ष 2021 में गांव काब्रच्छा निवासी संदीप नरवाना रोड पर वाहनों की लाइट लगने से सांड़ के साथ टकरा कर गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
-फरवरी 2021 में जाट धर्मशाला के पास दो सांड़ भिड़ गए थे, जिससे बाइक सवार हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी निवासी राजेंद्र और उनकी पत्नी घायल हो गईं थी।
-अप्रैल 2020 में बस अड्डे के सामने बाइक के आगे बेसहारा सांड़ आने से छात्तर गांव के दो युवक गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
-अप्रैल 2020 में जुलाना के वार्ड-3 निवासी 85 वर्षीय फूलपति और 95 वर्षीय हवा सिंह को सांड़ ने टक्कर मार दी थी, जिससे दोनों की मौत हो गई थी।
-अप्रैल 2020 में ही बाइपास पर बाइक के आगे गाय आने से अहिरका निवासी मनोज और राहुल की मौत हो गई थी।
-वहीं किनाना के पास आवारा गोवंश के कारण हादसे में वकील कमल गोस्वामी की मौत हो गई थी।
जाट संस्था के उपप्रधान मा. रण सिंह की मौत भी आवारा गोवंश की चपेट में आने से हुई थी।
वर्ष 2020 में दालमवाला गांव के पास सांड के साथ बाइक की टक्कर में युवक की मौत हो गई थी जबकि दो गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
कोट
बेसहारा गोवंश को पकड़कर नंदीशाला में छोड़ने के दावे खोखले हैं। इस समय जिला में 1800 से ज्यादा गोवंश घूम रहे हैं। इसमें कई नगर परिषद की ओर से टैग लगाकर नंदीशाला छोड़े गए गोवंश भी है। इनसे आए दिन हादसे हो रहे हैं।
-सुनील वशिष्ठ, शहरवासी
नगर परिषद को गोवंश पकड़ने के लिए अभियान चलाना चाहिए। हालांकि पहले भी अभियान के दौरान काफी गोवंश नंदीशाला में छोड़ा गया था, जिससे सड़कों पर गोवंश की संख्या कम हो गई थी, लेकिन अब फिर बेसहारा गोवंश बाहर खुले में घूम रहे हैं।
अतुल चौहान, शहरवासी