11जेएनडी25: बाल श्रम से मुक्त करवाए गए बच्चों के साथ संस्था के सदस्य। स्रोत : संस्था
जींद। कभी होटलों में बर्तन मांजते, कभी कूड़े के ढेरों में प्लास्टिक और कबाड़ तलाशते तो कभी सड़कों और बाजारों में भीख मांगने वाले सैंकड़ों बच्चों की जिंदगी पिछले 22 महीनों में बदल गई। बाल श्रम, भिक्षावृत्ति और शोषण के दलदल में फंसे इन बच्चों को मुक्त कराकर शिक्षा, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन की मुख्यधारा से जोड़ने का काम जिले में लगातार किया जा रहा है।
विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर जिले के आंकड़ों से साफ है कि अगस्त 2024 से जिले में बाल श्रम उन्मूलन के लिए व्यापक अभियान चलाया गया। इस दौरान एमडीडी ऑफ इंडिया ने मानव तस्कर विरोधी इकाई के साथ मिलकर करीब 200 संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन संचालित किए।
इन अभियानों में 374 बच्चों को बाल श्रम और अन्य शोषणकारी परिस्थितियों से मुक्त कराया गया। मुक्त कराए गए बच्चों में 282 लड़के और 92 लड़कियां शामिल हैं। इनमें 129 बच्चे विभिन्न प्रतिष्ठानों और कार्यस्थलों पर मजदूरी करते मिले जबकि 155 बच्चे कूड़ा-कचरा बीनने जैसे जोखिमपूर्ण कार्यों में लगे हुए थे।
इसके अलावा 90 बच्चों को भिक्षावृत्ति से मुक्त कराकर उनके पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू कराई गई। अभियान की एक और बड़ी उपलब्धि 22 गुमशुदा और परिवारों से बिछुड़े बच्चों एवं युवाओं को उनके परिजनों से मिलवाना रही। लंबे समय से अपनों से दूर रह रहे इन बच्चों की घर वापसी कई परिवारों के लिए भावुक पल लेकर आई। बाल श्रम केवल आर्थिक मजबूरी का विषय नहीं, बल्कि बच्चों के अधिकारों और भविष्य से जुड़ा गंभीर सामाजिक मुद्दा है। मजदूरी करने वाला हर बच्चा स्कूल, खेल और बेहतर जीवन के अवसरों से वंचित रह जाता है।
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विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर लोगों से अपील है कि यदि कहीं कोई बच्चा मजदूरी, भिक्षावृत्ति या शोषण की स्थिति में दिखाई दे तो उसकी सूचना तुरंत प्रशासन व एमडीडी ऑफ इंडिया को दें। समाज की सामूहिक भागीदारी से ही हर बच्चे को सुरक्षित बचपन और उज्ज्वल भविष्य मिल सकता है।
-नरेंद्र शर्मा, जिला कोर्डिनेटर एमडीडी ऑफ इंडिया।