चोरों ने ठगी का नया तरीका खोजकर अपना काम आसान कर लिया है जबकि पुलिस के लिए इस प्रकार के मामलों को सुलझाने का काम कठिन हो गया है। यह तरीका एटीएम कार्ड के साथ हेराफेरी कर किया जाता है। अब तक जिले में एटीएम कार्ड बदलकर या फिर एटीएम के नंबर जानकर या फिर एटीएम केबिन में पैसे निकलवाने वाले के साथ खड़े होकर एटीएम पिन नंबर जानकर लोगों के साथ धोखाधड़ी की जा रही है। इस तरह की धोखाधड़ी के शिकार जिले में 11 माह में 45 लोग हो चुके हैं। इनमें से अब तक पुलिस दो ही मामलों को ट्रेस कर पाई। इसके अलावा सभी मामले पुलिस की फाइलों में धूल फांक रहे हैं।
चोरों के इस तरीके का पुलिस के पास कोई तोड़ नहीं है। यह अकेले जींद शहर के थाने ही नहीं बल्कि जिले भर के प्रत्येक थाने में इस तरह की शिकायत आई हैं। जिले के सभी थानों में से एक शहर थाना जींद व एक अलेवा थाने में एटीएम के साथ हुई धोखाधड़ी के मामले ट्रेस हुए हैं। इसके अलावा ठगी के 43 मामले अनसुलझे हैं। इनका पुलिस अभी तक कोई सुराग नहीं लगा सकी। इन सभी मामलों में 29 लाख 68 हजार से ज्यादा रुपये का लोगों को चूना लगा है। इसके अलावा अलेवा और जींद शहर थाना पुलिस ने इस तरह के दो मामलों को सुलझाकर 33 हजार रुपये की रिकवरी की है। इसके अलावा सभी 43 लोगों को उनके साथ हुई धोखाधड़ी के मामले को पुलिस द्वारा सुलझाने का इंतजार बना हुआ है। इनमें अधिकतर मामले एटीएम के साथ ऑनलाइन ठगी के हैं। कुछ में एटीएम बदला तो ज्यादातर एटीएम बदले बिना ही ठगी के लोगों को शिकार बनाते हैं।
पुलिस के पास नहीं इनका तोड़, सावधानी ही बचाव
इस तरह की ठगी को अंजाम देने वालों का पुलिस के पास कोई तोड़ नहीं है। इसके कारण ही जिले में 45 में से केवल दो ही मामले ट्रेस हुए हैं। इसके अलावा सभी मामले निपटान का इंतजार कर रहे हैं। इसमें सावधानी ही बचाव मानी जाती है। पुलिस बार-बार लोगों से फोन आने पर किसी को भी अपना एटीएम कार्ड या पिन नहीं बताने को कहती है। बैंकों की तरफ से भी बार-बार यही मैसेज आते हैं कि वह अपने किसी भी ग्राहक से उसका एटीएम नंबर या पिन नहीं पूछ सकता। यदि कोई आपका एटीएम पिन या नंबर पूछता है तो वह ठगी करने वाला है।
अब एक नया तरीका फेसबुक हैक कर मंगवाए जा रहे रुपये
इस तरह के शातिर चोरों ने एक नया काम फेसबुक आईडी हैक करके बीमारी के नाम पर रुपये मांगने का निकाला है। इसमें भी अनोखा काम लोगों के साथ होता है। पहले हॉय हैलो और उसके बाद बच्चे को बीमारी बताकर जानकारों से पैसे मांगे जा रहे हैं। इस तरह के मामलों में भी पुलिस के पास जिले में कई शिकायतें मिल चुकी हैं।
जींद शहर और सफीदों थाने में सबसे ज्यादा ठगी के शिकार
जींद शहर थाने में बैंक खाते में हुई धोखाधड़ी के 13 व इसी तरह सफीदों थाने में भी 13 मामले सामने आए हैं। इसके अलावा 11 मामले नरवाना थाना के हैं। इनके अलावा सभी थानों में एक व दो मामले इस तरह की ठगी के लंबित हैं।
दूसरे प्रदेशों के लोग देते हैं ऑनलाइन ठगी को अंजाम
बैंक उपभोक्ताओं को ऑनलाइन ठगी का शिकार बनाने वाले अधिकतर लोग दूसरे प्रदेशों के होते हैं। जिस खाते में वह फर्जीवाड़ा करके पैसे ट्रांसफर करते हैं, वह खाते भी फर्जी होते हैं। इस प्रकार के खातों से पैसे तुरंत निकाल लिए जाते हैं, जब तक पुलिस की जांच खाता धारक तक पहुंचती है, वहां कुछ नहीं मिलता। इसी प्रकार जिस मोबाइल से फोन किए जाते हैं, वह भी फर्जी आईडी पर निकलवाए होते हैं इसलिए इस प्रकार के मामले ट्रेस करना पुलिस के लिए सिरदर्द बने रहते हैं।
जल्द होगा सभी मामलों को निपटान : एएसपी
बैंक खातों के साथ हुई ठगी के मामलों का शीघ्र निपटान करने के लिए पुलिस काम कर रही है। अभी तक लगभग दो लाख रुपये की बरामदगी हुई है। अगर कोई भी व्यक्ति बैंक अधिकारी या कोई अन्य तरह का कर्मचारी बनकर बात करे और एटीएम के बारे में किसी प्रकार की जानकारी मांगे तो उसको अपने खाते से संबंधित कोई भी जानकारी नहीं दें। इन सभी मामलों का निपटान करने के लिए पुलिस की विशेष टीम काम कर रही है। अभी तक तीन से चार मामलों का निपटान किया गया है। इस तरह की ठगी का शिकार होने से बचने के लिए लोगों का जागरूक होना अति आवश्यक है।