जींद। किसान गेहूं के फानों को बे-रोकटोक आग लगा रहे हैं। इससे पर्यावरण को नुकसान होने के साथ मिट्टी की उर्वरा शक्ति घट रही है। रोजाना फानों में लगाई जा रही आग के प्रति जिला प्रशासन गंभीर नहीं है। जिले में हर रोज लगभग 150 एकड़ में फाने जलाए जा रहे हैं, मगर कृषि विभाग अभी तक 160 जगह को ही ढूंढ़ पाया है। उनमें भी 86 जगह फानों में आग लगने की घटना मिली। 84 किसानों पर कृषि विभाग ने 14500 रुपये जुर्माना भी किया है। यदि जिले में फाने जलाने के मामले नहीं रुके तो इसका असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ेगा। सांस, दमा और दिल के मरीजों को ज्यादा परेशानी होगी। जिला प्रशासन को चाहिए कि फाने जलाने के मामलों पर तुरंत रोक लगाए।
खेतों में आग लगाकर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने पर जुर्माने का प्रावधान किया गया है, मगर लोगों को इसका डर नहीं है। वह फाने को आग लगा रहे हैं। इससे जिले का एक्यूआई (एयर क्वालिटी इंडेक्स) 100 के पार हो गया है, जबकि पिछले दिनों यह 80 से 85 के बीच था। फाने जलाने पर नियमानुसार ढाई एकड़ तक 2500 रुपये, पांच एकड़ तक पांच हजार रुपये और पांच एकड़ से ऊपर 15 हजार रुपये जुर्माना लगाने का प्रावधान है।
रात को सड़कों तक पहुंच जाती है आग
रात के समय ज्यादा जगह फानों में आग लगाई जाती है। कई बार आग सड़क तक पहुंच जाती है। यह वाहन चालकों के लिए खतरा बन जाती है। इससे हादसा होने का डर रहता है। वहीं फाने जलाने से चारों तरफ धुआं-धुआं फैल जाता है। इससे वाहन चालकों को रास्ता नहीं दिखाई देता और उनको हादसा होने का डर रहता है। फानों को जलाने से उठने वाले धुएं से आंखों में जलन होने लगती है और सांस लेने में दिक्कत आीत है। जैसे-जैसे एक्यूआई बढ़ता है वह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होने लगता है। 50 तक एक्यूआई अच्छा रहता है। उसके बाद 50 से 100 तक मध्यम रहता है। 100 से 200 के बीच एक्यूआई स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं होता है। 200 से 300 तक एक्यूआई पहुंचने पर स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बन जाता है।
प्रशासन की अपील नहीं मान रहे किसान
जिला प्रशासन बार-बार किसानों से अपील कर रहा है कि वे फानों में आग न लगाएं। इससे जमीन की उर्वरा शक्ति क्षीण होने के साथ पर्यावरण को भी नुकसान हो रहा है। इससे आगामी फसलों की पैदावार पर भी असर पड़ता है। फसल अवशेष को आग लगाने से जमीन में मौजूद कार्बनिक पदार्थ नष्ट हो जाते हैं। इससे जमीन का स्वास्थ्य खराब हो जाता है। मित्र कीट व सूक्ष्म जीव नष्ट हो जाते हैं, जिससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति क्षीण हो जाती है। फानों में आग लगाने वाले किसानों पर कार्रवाई के लिए कृषि विभाग की टीम गठित की हुई है, जो मौके पर जाकर जुर्माना भी लगाई है।
फसल अवशेष को जलाने वालों पर प्रशासन सेटेलाइट से नजर रख रहा है। अब तक 86 जगह गेहूं के फानों में आग लगने की जांच कर 84 किसानों पर 14500 रुपये जुर्माना लगाया जा चुका है। यदि कोई फसलों के अवशेष जलाते हुए मिला तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर जुर्माना लगाया जाएगा। -नरेंद्रपाल, नोडल अधिकारी, कृषि विभाग जींद।
09जेएनडी11-जिले के फरैण-समैण रोड पर लगाई गई गेहूं के फानों में आग। संवाद