जींद। जींद की जाट धर्मार्थ सभा के 30 साल के इतिहास में पहली बार चुनाव हुए हैं। इससे पहले सर्वसम्मति से ही प्रधान चुन लेते थे। प्रधान पद के चुनाव में फूलकुमार जीते जबकि उप प्रधान किताब सिंह भनवाला बने। वहीं जनरल सेक्रेटरी सुरजीत धनखड़ जीते। यादवेंद्र खर्ब ने सचिव पद के लिए जीत दर्ज की।
चुनाव को लेकर मतदाताओं में काफी उत्साह नजर आया। सुबह से ही मतदान करने के लिए मतदाता पहुंच गए थे। प्रधान पद के लिए ईश्वर सिंह, फूलकुमार और बलजीत सिंह नरवाल चुनाव लड़ रहे थे। इसमें फूलकुमार को 53 मत मिले जबकि ईश्वर सिंह को 50 मत मिले वहीं बलजीत सिंह को एक मत मिला। इसमें फूलकुमार प्रधान चुने गए।
उप प्रधान के लिए किताब सिंह और बलजीत सिंह मैदान में थे। इसमें किताब सिंह भनवाला को 53 तो बलजीत को 48 मत मिले। कितान सिंह भनवाला उप प्रधान बनने में कामयाब रहे। जनरल सेक्रेटरी के लिए सुरजीत धनखड़ व ओम सिंह श्योकंद चुनाव मैदान में थे। इसमें सुरजीत धनखड़ को 52 तो ओमसिंह श्योकंद को 50 मत मिले। सुरजीत धनखड़ जनरल सेक्रेटरी चुने गए।
सचिव पद के लिए यादवेंद्र खर्ब व राजकुमार चुनाव मैदान में थे। इसमें यादवेंद्र खर्ब को 60 तो राजकुमार को 41 मत मिले। यादवेंद्र खर्ब सचिव पद पर जीते। ट्रेजर पद के लिए बलवंत सिंह और राजपाल सिंह के बीच मुकाबला था। इसमें बलवंत सिंह को 57 मत मिले जबकि राजपाल को 46 मत मिले। इसमें बलवंत सिंह विजयी रहे जबकि सदस्य पद के लिए जोंगेंद्र सिंह विजयी रहे।
प्रधान पद को लेकर चल रही थी गहमागहमी
जाट धर्मशाला प्रधान पद को लेकर काफी लंबे समय से रार चली आ रही थी। कुछ समय पहले कॉलेजियम के चुनाव हुए थे जिसमें कॉलेजियम चुन लिए गए। वीरवार को प्रधान पद और अन्य कार्यकारिणी का चुनाव हुआ।
सर्वसम्मति के अंतिम प्रयास हुए थे नाकाम
जींद की अर्बन एस्टेट कॉलोनी की जाट धर्मशाला की संचालक जाट धर्मार्थ सभा की कार्यकारिणी सर्वसम्मति से बनाने का अंतिम प्रयास रविवार को नाकाम हो गया था। सर्वसम्मति बनाने के लिए बुलाई गई बैठक में जाट धर्मार्थ सभा में बने एक बड़े गुट के समर्थक कॉलेजियम सदस्यों में से ज्यादातर नहीं पहुंचे थे।
विभाजन के कगार पर जाट धर्मार्थ सभा
जाट धर्मार्थ सभा विभाजन के कगार पर पहुंच चुकी है। 30 साल से भी ज्यादा लंबे इतिहास में पहली बार जींद की जाट धर्मार्थ सभा में चुनाव की नौबत आई है। इस संस्था की मजबूती इसकी एकजुटता थी और अब यही एकजुटता तार-तार हो गई है। इसकी चौधर के लिए उन्होंने जाट धर्मार्थ सभा के सर्वसम्मति से कार्यकारिणी चुनने के गौरवशाली इतिहास को अतीत में धकेल दिया है। इसके लिए इन लोगों को सभा के आजीवन सदस्यों के सामने जवाब कभी न कभी देना पड़ेगा।