for 20 days, the women kept traveling in 2 districts for filing an fir
बैंक खाते के साथ धोखाधड़ी कर 26500 रुपये निकालने पर शहर थाना पुलिस ने युवती की शिकायत पर 20 दिन बाद मामला दर्ज किया है। धोखाधड़ी की शिकार हुई युवती ने बताया कि पुलिस ने घटना के 20 दिन बाद मामला दर्ज किया है। इस दौरान वह चार बार रोहतक पुलिस थाने और दो बार जींद शहर थाना में गई। रोहतक और जींद पुलिस ने हर बार उसको अपने क्षेत्र की घटना नहीं होने की बात कहकर लौटाते रहे।
सलोनी ने बताया कि उसका बैंक खाता रेलवे रोड स्थित एसबीआई में है। वह रोहतक एसबीआई में नौकरी करती थी। 25 जनवरी को उसने अपने खाते से एक हजार रुपये एटीएम कार्ड के माध्यम से निकाले थे। उस समय कोई व्यक्ति एटीएम में नहीं था। 25 जनवरी शाम को उसके खाते से 26500 रुपये निकलने का संदेश आया। इसकी जानकारी उसने बैंक में दी। बैंक से पुलिस के पास शिकायत लेकर गई। इसमें जींद की शहर थाना पुलिस ने उसको रोहतक में घटना होने की बात कहकर रोहतक पुलिस के पास जाने के लिए कहा। जब वह रोहतक गई तो वहां से उसको वापस जींद के शहर थाना में यह कहकर भेज दिया कि उसकी रिहायश जींद में है। आपके साथ हुई धोखाधड़ी की शिकायत जींद के शहर थाना में ही दर्ज होगी। इसी तरह वह शिकायत देेने के लिए चार बार रोहतक और दो बार जींद के शहर थाना के अंतर्गत आने वाली पटियाला चौक चौकी में गई। एक बार फिर शहर थाना में शिकायत देने के लिए पहुंची। इसके बावजूद भी उसकी शिकायत दर्ज नहीं हुई। परेशान हुई युवती ने इस मामले की शिकायत शनिवार को एसपी जींद को दी। इसके बाद शिकायत दर्ज हुई। हेड कांस्टेबल सतीश कुमार ने बताया कि युवती की शिकायत पर धोखाधड़ी कर 26500 रुपये निकालने का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
रोहतक और जींद पुलिस ने नहीं उठाई जीरो एफआईआर दर्ज करने की जहमत
इस तरह के मामले में पुलिस को चाहिए की वह शिकायतकर्ता की प्राथमिक रिपोर्ट दर्ज कर उसके संबंधित थाने में भेज दे, लेकिन जींद और रोहतक पुलिस ने युवती की शिकायत पर जीरो एफआईआर दर्ज नहीं की। इसके बावजूद युवती से थानों के चक्कर कटवाकर उसको परेशान करने का काम किया गया। इस तरह की घटना में पुलिस का यह रवैया आए दिन सामने आ रहा है।
लापरवाही करने वाले के खिलाफ होगी कार्रवाई : डीएसपी
इस तरह के मामले में जिस जगह पर पीड़ित का बैंक खाता होता है, वहां पर शिकायत दर्ज करने की प्राथमिकता है। अगर फिर भी किसी पुलिस कर्मचारी या अधिकारी ने शिकायत दर्ज करने में लापरवाही की है और पीड़ित किस अधिकारी या कर्मचारी से मिली है, उसके मिलने के सबूत उसको दिए जाएं। लापरवाह पुलिस कर्मचारी या अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करेंगे। इस तरह से किसी भी पीड़ित को परेशान नहीं होने दिया जाएगा।
धर्मबीर, डीएसपी सिटी।