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सरसों के तेल में की गई बढ़ोतरी से लोगों पर बढ़ा आर्थिक बोझ : कपूर सिंह

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जींद। जिले में खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के 2.58 लाख उपभोक्ता हैं। सरसों के तेल की कीमत बढ़ने पर इन बीपीएल परिवारों पर भार पड़ा है। इसके चलते भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने बढ़े हुए सरसों के तेल के दाम वापस लेने की सरकार से मांग की है, ताकि गरीब लोग अपने परिवार का खर्च ठीक से चला सकें।
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माकपा के जिला सचिव कामरेड कपूर सिंह ने कहा कि प्रदेश की भाजपा सरकार ने बीपीएल परिवारों को राशन डिपो पर मिलने वाले सरसों के तेल को 40 रुपये से बढ़ाकर 100 रुपये कर दिया है। यह बढ़ोतरी 66 प्रतिशत से भी अधिक है। भाजपा सरकार ने खाना पकाने के तेल में वृद्धि करके गरीबों पर और बोझ डाल दिया है।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार एक के बाद एक जनविरोधी फैसले ले रही है। अप्रैल महीने में रसोई गैस सिलेंडर के दामों में 50 रुपये बढ़ोतरी की गई थी। भाजपा शासन काल में रसोई गैस सिलेंडर 400 रुपये से बढ़कर 855 रुपये तक पहुंच गया है।
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इसी तरह पेट्रोल-डीजल के बार-बार बढ़ाए गए दामों के कारण महंगाई बढ़ गई है। हाल ही में टोल प्लाजा के बढ़ाए गए रेट और एक जुलाई से रेल के किराये में की गई वृद्धि से लोग त्रस्त हैं। हरियाणा में अभी बिजली की दरों में भी भारी वृद्धि की गई है।
भाजपा सरकार द्वारा लगातार लिए जा रहे इन फैसलों से लोग तंग आ चुके हैं और अपने आपको ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर जल्द सरसों के तेल के बढ़े हुए दाम को वापस नहीं लिया तो वह आंदोलन करने पर मजबूर होंगे।
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