जींद। गांव अहीरका निवासी मुकेश राठौड़ सेना में भर्ती होकर देश सेवा करना चाहते थे लेकिन काफी प्रयासों के बावजूद सेना में नहीं जा पाए। इसलिए सेवा का दूसरा रास्ता निकालते हुए अपना रोटी रथ शुरू किया। आज मुकेश राठौड़ रेलवे स्टेशन व जयंती देवी मंदिर के पास स्थायी रूप से लोगों को भोजन करवाते हैं। इसके अलावा पूरे शहर में भी अपना रोटी रथ के नाम से गाड़ी में घूम-घूमकर जरूरतमंद लोगों को भोजन करवा रहे हैं। उनकी यह सेवा दोस्तों के सहयोग तथा लोगों द्वारा दान किए आटा, दाल व चावल से चल रही है।
एमए राजनीतिक शास्त्र व पीजीडीसीए पास मुकेश राठौड़ ने सेना में जाने के लिए काफी प्रयास किए। दिनरात मेहनत करके शारीरिक परीक्षा की तैयारी की लेकिन सेना में भर्ती नहीं हो पाए। इसके बाद उन्होंने लोगों की सेवा करने की सोची। 13 मार्च 2018 को उन्होंने अपना रोटी रथ नाम से जरूरतमंद लोगों को भोजन करवाने की योजना शुरू की। शुरुआत में कुछ दोस्त साथ आए तो धीरे-धीरे अन्य लोग भी सहयोग को आने लगे। आज उनको लोग दाल, आटा व चावल का दान करते हैं। इससे वह पूरे शहर में घूम-घूमकर जरूरतमंद लोगों को भोजन करवा रहे हैं। कोई भी व्यक्ति अपना रोटी रथ को रोक कर भोजन कर सकता है। स्थायी रूप से जयंती देवी मंदिर के पास व रेलवे स्टेशन पर गाड़ी खड़ी रहती है।
लैब अटेंडेट की नौकरी छूटी
मुकेश राठौड़ को राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल कंडेला में लैब अटेंडेंट की नौकरी मिली थी। 2014 में जब भाजपा की सरकार बनी तो जिस कंपनी के माध्यम से मुकेश राठौड़ लैब अटेंडेंट लगे थे, उस कंपनी को सरकार ने ब्लैक लिस्ट कर दिया। इसके बाद उनकी नौकरी छूट गई। उन्होंने गांव में जनरल स्टोर किया। इसमें काफी आमदनी होने लगी। इसके बाद इस स्टोर को उनकी पत्नी ने संभाल लिया तो मुकेश राठौड़ के पास समय बचने लगा। इसी समय का सही सदुपयोग करने के लिए मुकेश राठौड़ ने अपना रोटी रथ शुरू किया।
शादियों में बचा खाना भी देते हैं लोग
मुकेश राठौड़ बताते हैं कि कई बार शादी समारोह या अन्य कार्यक्रम में काफी खाना बच जाता है। लोग उनको फोन करके यह खाना लेकर जाने के लिए कहते हैं। वह शादियों से बचा हुआ खाना ले आते हैं और जरूरतमंद लोगों के खिला देते हैं। कुछ ऐसे भी लोग हैं जो शादियों में कुछ ज्यादा खाना बनाकर उसमें से अपना रोटी रथ को दान कर देते हैं, जिससे जरूरतमंद लोगों का पेट भर सके।
खुशी के अवसर पर लोग करते हैं दान
काफी लोग ऐसे हैं, जो अपने जन्मदिन, सालगिरह या अन्य खुशी के मौके पर अपना रोटी रथ को फल फ्रूट भी दान करते हैं। लोग खुद इधर-उधर घूमकर लोगों को फूल, फ्रूट या अन्य खाद्य सामग्री बांटने की बजाय अपना रोटी रथ को दान करते हैं। अपना रोटी रथ यह सामग्री लोगों को वितरित कर देता है।