कृषि कानूनों के विरोध में खटकड़ टोल के पास किसानों का धरना जारी है। रविवार को धरने की अध्यक्षता नारायण दत्त शर्मा शाहपुर ने की। सांकेतिक भूख हड़ताल पर सुदेश, गुड्डी, शीला, नरेश, कमलेश रूपगढ़ रहे।
संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर पांच जून को भाजपा व जेजेपी सांसदों व विधायकों के आवास के बाहर संपूर्ण क्रांति दिवस के तहत तीनों कृषि कानूनों की प्रतियां फूंकने का फैसला लिया गया है। किसानों ने धरने के माध्यम से पीएम द्वारा की गई मन की बात पर मांग कि पीएम अपने मन की बात कहने की बजाय दिल्ली बॉर्डर पर धरना दे रहे किसानों के मन की बात सुनें। किसान नेता आजाद पालवां व खेड़ा खाप प्रधान सतबीर पहलवान ने कहा कि पीएम ने कहा था कि उनके और किसानों के बीच एक फोन कॉल की दूरी है। आज तक किसानों को वह नंबर नहीं मिला है, जिससे पीएम नरेंद्र मोदी से बात हो सकें। उन्होंने कहा कि जब से भाजपा सत्ता में आई है पीएम मन की बात लोगों से कर रहे हैं। पीएम को चाहिए कि वे किसानों के मन की बात सुनें। दिल्ली सीमा पर पिछले छह महीने से किसान कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर धरना दे रहे हैं। किसानों के मन की बात पीएम नरेंद्र मोदी नहीं सुन रहे हैं। किसान हितैषी होने के दावे भाजपा करती है, लेकिन आज तक स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू नहीं की गई। सत्ता में आए हुए भाजपा को सात साल हो चुके हैं, लेकिन उनसे हर वर्ग परेशान है।